औरों की तुलना में स्विस बैंक खातों में भारतीय ज्यादा: असांजे

May 3, 2011

पचास और साठ के दशक में सुने जाने वाले कुछ चुटकुले, शीत युध्द के दो प्रमुख प्रतिद्वन्द्वियों द्वारा एक-दूसरे के विरुध्द गढ़े जाते थे जोकि काफी तीखे हुआ करते थे।

 

हालांकि सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम सचिव, कामरेड ख्रुश्चेव के बारे में यह प्रसिध्द था कि वे स्वयं पर चुटकुले सुनाते थे। क्रेमलिन यात्रा पर आए एक समूह को उन्होंने एक बार बताया कि एक सुबह मास्को पुलिस उस समय दंग रह गई जब उसने क्रेमलिन की दीवारों पर यह पोस्टर लगा देखा: ख्रुश्चेव एक मूर्ख मंदबुध्दि हैं।

 

इस पोस्टर को तुरंत साफ किया गया, दोषी की शीघ्रता से पहचान कर गिरफ्तार किया गया और मुकदमा चलाया गया।

 

सोवियत नेता ने बताया कि अदालत ने दोषी को 21 वर्ष की कठोर सजा सुनाई, एक वर्ष सरकारी भवन को गंदा करने पर तथा 20 वर्ष सरकारी गोपनीयता को उजागर करने पर।

 

विकीलीक्स के एडिटर-इन-चीफ जुलियन असांजे इन दिनों  काफी सुर्खियों में हैं। और उनका मुख्य कार्य है: खुली सरकार के उनके लक्ष्य के लिए अधिकाधिक गुप्त सूचनाओं और गुप्त दस्तावेजों को रहस्योद्धाटित करना जितना वह कर सकते हैं।

 

विकीलीक्स की स्थापना सन् 2006 में हुई। आज उनके पांच प्रमुख मीडिया भागीदार हैं: दि न्यूयॉर्क टाइम्स, ली मोण्डे, दि गार्जियन, एलपेस और डेर स्पेइगलA

 

असांजे आस्ट्रेलिया के टाऊनविले, क्वीन्सलैण्ड में जन्मे हैं।

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नवम्बर, 2010 से विकीलीक्स ने अपने पास उपलब्ध 2,51,000 अमेरिकी कूटनीतिक केबल्स को रहस्योद्धाटित करना शुरु किया है। इनमें से 53 प्रतिशत गैर-वर्गीकृत, 40 प्रतिशत गोपनीयऔर मात्र 6 प्रतिशत से ज्यादा गुप्तश्रेणी के हैं। लेकिन वाशिंगटन इस बारे में काफी कुपित है और उसने जुलियन असांजे के विरुध्द अपराधिक जांच शुरु कर दी है।

 

arnab-goswamiगत् सप्ताह टाइम्स नाऊके अरनब गोस्वामी ने उनसे एक बेहतरीन इंटरव्यू किया, इस दौरान अरनब ने उनका ध्यान न केवल हमारे देश में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की ओर खींचा अपितु गुप्त स्विस खातों में भारतीय सम्पति के मुद्दे की ओर भी खींचा।

 

इस इंटरव्यू की पाण्डुलिपि 15 पृष्ठों में है।

 

यहां इसमें से कुछ अंश दिए जा रहे हैं जो विदेशी टैक्स हेवन्स में भारतीय धन के बारे में हैं:

 

टाइम्स नाऊ: आज भारत में सर्वाधिक बड़ा मुद्दा स्विस बैंकों की गोपनीयता का है और मैं जानता हूं कि इसके बारे में लोगों की रूचि के बारे में आप परिचित हैं। यह बहस तीन दशकों से जारी है। आप इस बारे में क्या सोचते हैं? इन गुप्त स्विस खातों के बारे में-मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि आपने स्विस बैंकों में पड़े भारत के काले धन के बारे में अवश्य सुना होगा?

जुलियन असांजे: मैंने ईयू से एक रिपोर्ट देखी है स्विस से विरोधी लेकिन एक अधिकारिक रिपोर्ट कि स्विस बैंकों में अन्य देशों की तुलना में भारतीयों का ज्यादा धन जमा है। अत: इस पर चिंता होनी चाहिए। अफ्रीका में किए गए अपने कार्य में मैंने पाया कि केन्या से 3 बिलियन डॉलर निकाल कर दुनिया सहित स्विस बैंकों में जमा कराए गए। और यह मेरे ध्यान में आया कि यह स्थानीय भ्रष्टाचार से ज्यादा खराब है क्योंकि जब स्थानीय भ्रष्टाचार होता है, जब कोई एक मंत्रालय से चुराकर भारत में अपनी कम्पनी में रखता है और भारत में खर्च करता है, भले ही सरकार को भी पैसे का नुकसान हो रहा है तब भी भारत के लोगों के हाथ से पैसा नहीं जा रहा। लेकिन जब पैंसे को विदेश ले जाया जाता है, तब कोई स्विस बैंक को मिलियन डॉलर भेजता है, वे स्विस फ्रेंक्स (मुद्रा का नाम) खरीदता है और वे रूपये को बेच रहे हैं तथा नतीजा यह हो रहा है कि राष्ट्र की मुद्रा अस्थिर हो रही है। और इस प्रकार भ्रष्टाचार में दुगुनी वृध्दि होती है, इस स्थानांतरण के चलते भारतीयों के लिए सभी चीजें और महंगी होती हैं।

 

टाइम्स नाऊ: मैं नहीं जानता कि आपने भारत के सबसे बड़े करवंचक हसन अली के बारे में सुना है या नहीं। इस समय वह जेल में है। उसके एक खाते में ही 8 बिलियन डॉलर हैं और बाद में जब सरकार ने जांच की तो उसमें एक दिन 60000 डॉलर पाए गए और अगले दिन कुछ भी नहीं। इस प्रकार पैसा निकाल लिया गया। मि0 असांजे, अब भारत सरकार का तर्क है कि कुछ नियम-कानून हैं। सरकार सदैव ही तर्क देती है। पहला, राष्ट्रीय सुरक्षा और दूसरा अंतरराष्ट्रीय कानून और प्रोटोकॉल। अंतरराष्ट्रीय कानूनों और प्रोटोकॉल के बारे में वे कहते हैं कि स्विटजरलैण्ड के साथ दोहरे कराधान का समझौता है, हमें उसका सम्मान करना चाहिए, इसी प्रकार अन्य यूरोपीय देशों के साथ के समझौतों का भी हमें सम्मान करना चाहिए। हम इन नियमों को तोड़ नहीं सकते। लेकिन भारत में इस बारे दृढ़ मत है कि यदि दोनों तरफ की सरकारें चाहें तो वे नियमों को तोड़ सकती हैं। अत: यह संरक्षण देने की प्रणाली है, क्या ऐसा नहीं है?

 

जुलियन असांजे: क्यों नहीं, वे इसे बदल सकते हैं। मेरा मतलब है कि मेरा स्विस बैंक खाता है।

 

टाइम्स नाऊ: सच में? इसमें कितना जमा है?

 

जुलियन असांजे: स्विटज़रलैण्ड के पोस्ट ऑफिस में मेरा स्विस बैंक खाता है। इसमें बैंक खाते भी चलते हैं। और मेरा स्विस बैंक खाता अमेरिकी दवाब के चलते बंद कर दिया गया। हमारे कानूनी बचाव के लिए फण्ड जुटाने हेतु हमारा बैंक खाता सर्वविदित है। केबलगेट के 4 दिनों के भीतर ही इसे (दवाब में) बंद कर दिया गया। अत: यह कहना सही नहीं है कि यदि ये करना चाहें तो ये संगठन और सरकारें वैकल्पिक प्रस्ताव नहीं सुझा सकतीं।

 

टाइम्स नाऊ: तो दोहरे कराधान का मामला ऐसा नहीं है जो लागू होता हो।

 

assangeजुलियन असांजे: दोहरे कराधान का छुपा कर रखने वाले धन से कोई लेना-देना नहीं है। इस प्रकार यह धन को छुपा कर रखने से जुड़ा नहीं है। विदेशों में पैसा रखने के संदर्भ में, यह लागू हो सकता है लेकिन सम्बन्धित नागरिक भारतीय नहीं हो सकता। ऐसा ही मामला आस्ट्रेलिया में है जहां खदान कम्पनियों के अधिकांश शेयरधारी विदेशों से हैं…… अमेरिका से हैं और लाभ अमेरिका को दिया जा रहा है। इसलिए उन लाभों पर कोई कर नहीं था और आस्ट्रेलियाई सरकार ने फैसला किया कि वह खदान कम्पनियों पर विशेष कर लगाएगी क्योंकि खदान कम्पनियां बहुत ज्यादा धन अर्जित कर रहीं हैं और अन्य उद्योग नहीं। ऐसा करना पूर्णतया संभव है। आस्ट्रेलियाई सरकार ने ऐसा करने का निर्णय लिया हालांकि दिलचस्प यह रहा कि खदान लॉबी ने मिलकर प्रधानमंत्री केविन रूड्ड को हटाकर उनके स्थान पर दूसरे व्यक्ति जुलियन गिलार्ड को बैठा दिया और रहस्योद्धाटित किए गए केबल्स बताते हैं कि प्रधानमंत्री को हटाने की योजना कैसे बनी। अत: आस्ट्रेलिया के मामले में पूरी तरह से कानूनी तौर पर यह करना संभव नहीं था। इसके परिणामस्वरूप आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री केविन रूड्ड को अपना प्रधानमंत्री पद खोना पड़ा।

 

टाइम्स नाऊ: 17 जनवरी, 2011 को प्रेस कांफ्र्रेंस जिसमें इलमेर ने संवाददाताओं के सामने आपको आंकड़ों से भरी दो डिस्क दी थीं और उसने स्विस प्रणाली के बारे में जो कहा था ठीक वही आप कर रहे हैं. ….यह समाज को नुकसान पहुंचाता है। और तब से मि0 असांजे, भारत में लोग इस जानकारी के बाहर आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसमें हमारे सिस्टम की सर्वाधिक बड़ी बुराई को सही करने की संभावना है।

 

जुलियन असांजे: ठीक है, उस बारे में क्या हुआ, मैं आपको बताता हूं। सामान्यतया, हम अनाम स्त्रोतों से ही सम्बन्ध रखते हैं। मि0 इलमेर और उनकी कानूनी टीम ने उनके अपने कारणों के चलते जिन्हें मैं भी नहीं समझता, सार्वजनिक संवाददाता सम्मेलन करने का निर्णय किया। उसके बाद वह स्विटजरलैण्ड लौट गए और उन्हें तुरंत वहां गिरफ्तार कर लिया गया। जब जांच चल रही है तब वह अभी भी जेल में है। जहां तक मेरी जानकारी है उन पर तक कोई अभियोग नहीं लगाया गया। इस अवधि के दौरान वह अभी भी जेल में हैं। और एक तीसरे मध्यस्थ के माध्यम से हमें अप्रत्यक्ष प्रस्ताव मिला है कि यदि हम वह डिस्क जिनके बारे में माना जाता है कि उनमें डाटा है, को वापस लौटाते हैं तो वे मि. इलमेर को रिहा करने पर काम कर सकते हैं। इसलिए इस विषय के बारे में बात करते समय यह तथ्य ध्यान में रहना चाहिए कि स्विस बैंक के पास एक बंधक है।

 

टाइम्स नाऊ: अत: यह आपके लिए एक कठिन स्थिति है। आप उस व्यक्ति को जानते हैं जिसने आपको सीडी दी, वह बंधक है और इस समय उसके चलते उसने आपको यह जानकारी सार्वजनिक करने से रोक रखा है।

 

जुलियन असांजे: स्पष्ट रुप से मैं यह नहीं कह सकता कि उन सीडीज़ में क्या जानकारियां हैं और किस तरह की हैं। लेकिन हां, यह हमारे लिए अत्यंत कठिन भरी स्थिति है कि उन्हें सख्ती से बंधक बनाकर रखा गया है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि स्विटज़रलैण्ड….. की जीडीपी का लगभग 50 प्रतिशत अंश बैंकिग गतिविधियों से आता है। हमने अंतिम केस 2008 में स्विस बैंक जूलियन बेइर के बारे में किया…… उन्होंने हमें बंद करने की कोशिश की। उन्होंने केलिफोर्निया कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह एक बहुत बड़ा बन गया। अंतत: हम विजयी हुए और उनको इसकी कीमत लाभ में से लगभग 300 अमेरिकी मिलियन डॉलर हानि उठानी पड़ी। उन्हें अमेरिका में अपने कामकाज को बंद करना पड़ा। लेकिन मि. इलमेर का निजी जांचकर्ताओं ने पीछा किया-इसके पूरे दस्तावेज हैं और सिध्द हुआ है-इनको स्विस बैंकों ने पैसा दिया। यह एक मुश्किल काम है।

 

टाइम्स नाऊ : इस पर आपके तीखे विचार हैं। मैं पूरी तरह से समझ सकता हूं कि आप इस बारे में विस्तृत बात नहीं कर सकते। लेकिन मैं आपसे और साधारण रुप से पूछना चाहता हूं कि आप अपने दिल में इस परिस्थितियों में, आप उस जानकारी को थोड़ा सा जानते हुए, क्या नहीं बताना चाहेंगे कि सिस्टम कैसे काम करता है?

 

जुलियन असांजे: ठीक है हमारे पास दुनिया मे विभिन्न बैंकिग आपॅरेशन के बारे में अनेक प्रकार की सूचनाएं हैं। समय के साथ हमने इन्हें सार्वजनिक किया है। तथ्य यह है कि, इस पर होने वाली अधिक कानूनी कार्रवाई बैंका की तरफ से है। स्कॉटलैण्ड के बैंक… दुबई के बैंक …आइसलैण्ड के बैंक… हमें इन सभी बैंकों से कानूनी नोटिस प्राप्त हुए हैं। और हम उन बैंकों के बारे में डाटा प्रकाशित करना जारी रखेंगे जब तक हम ऐसा करने योग्य रहेंगे।

 

टाइम्स नाऊ: क्या आपको कोई भारतीय नाम देखने को मिले? मैं आपसे यह नहीं पूछ रहा कि मुझे बताएं कहां, कौन से बैंक…?

 

जुलियन असांजे : हां, जानकारी में भारतीयों के नाम हैं। हमने पहले ही प्रकाशित किया है या प्रकाशित करने जा रहे हैं। मुझे विशेष रुप से याद नहीं कि आने वाले प्रकाशन में भारतीयों के नाम हैं या नहीं। इसी प्रकार इन निजी स्विस बैंकिग संस्थानों में जहां आपको कम से कम एक मिलियन डॉलर की जरुरत होती है … यह एक महत्वपूर्ण राशि है ….एक औसत भारतीय की नहीं…       

 

टाइम्स नाऊ: और क्या इन नामों को पहचानने में कोई दिक्कत है। आप हमें कुछ भी बताना चाहेंगें ?

 

जुलियन असांजे : इस मौके पर मैं आपको कुछ भी नहीं बता पाऊंगा। जैसे हम जानकारी प्रसारित करते हैं वैसे ही हमेशा हमें अतिरिक्त जांच करनी पड़ती है। और जैसे ही हमें समझ आता कि कौन सा प्रभावी प्रकाशन हमारी इस जांच के साथ हमारी सहायता कर सकता है तो हम उसके साथ काम करते हैं। लेकिन अभी उस स्टेज पर नहीं पहुंचे हैं, साथ ही जानता हूं कि जांच चल रही है।    

 

टाइम्स नाऊ: हमारे भारतीय दर्शकों के लिए केवल एक बिन्दु। क्या उन्हें यह आशा छोड़ देनी चाहिए कि कभी भी ये नाम सामने नहीं आएंगे?

 

जुलियन असांजे : नहीं

 

टाइम्स नाऊ: आप उन्हें क्या कहना चाहेगें?

 

जुलियन असांजे: यही कि आप बिल्कुल उम्मीद मत छोड़िए। यह दिलचस्प है। यहां विभिन्न शक्तियां खेल, खेल रही है: विशेष रुप से जर्मन सरकार बहुत शक्तिशाली है। बैंकिग आपॅरेशन में पारदर्शिता की जरुरत है। यह सीडी खरीदने से कहीं आगे निकल गया है…लींचेटाइस्टन में… यह जानकारी सामने लाने से। जर्मन सरकार द्वारा बहुत आक्रामक तरीके से और यूरोप के भीतर जर्मन सरकार असरकारी सत्ता है। अत: यही जर्मनी रुख पूरे यूरोप में फैल गया है।  यूबीएस और करवंचकों के सम्बन्ध में अमेरिका भी इन दबाबों को लागू कर रहा है।

 

टाइम्स नाऊ: भारत की आर्थिक और राजनीतिक हस्ती के चलते क्या कोई कारण है कि भारत को आक्रामक नहीं होना चाहिए ?

   

जुलियन असांजे: नहीं, ऐसा कोई कारण नहीं  है कि भारत को क्यों नहीं आक्रामक होना चाहिए। वास्तव में, इसे और अधिक आक्रामक होना चाहिए क्योंकि ऐसा दिखता है कि जर्मनी की तुलना में भारत प्रति व्यक्ति कर धन ज्यादा खोता है।

 

विकीलीक्स की शुरूआत जिसे व्हिसलब्लोअर वेबसाइट कहा जाता है, के प्रमुख असांजे ने एक ब्लॉग में लिखा:

 

जितना गुप्त या अनुचित संगठन होगा उतना ही उसके नेतृत्व और योजना मण्डली में डर या पैरनॉइअ बाहर आने की प्रवृति रहती है….. स्वभाव से अनुचित सिस्टम होने के नाते विरोधियों को प्रवृत्त करने और अनेक स्थानों पर उसकी बात ऊपर रहने, व्यापक लीक होने से उनको अतिसंवेदनशील अवस्था में छोड़ देता है जो गवर्नेंस की खुली पध्दति से बदलना चाहते हैं।

 

टेलपीस (पश्च्य लेख)

अस्सी के दशक में प्रसिध्द लेखक एल्विन टाफॅलर द्वारा लिखित पॉवर शिफ्ट(power shift) में मानव समाज के क्रमिक विकास के साथ उनकी मान्यता प्रस्तुत की गई है कि पॉवर, सरकारी क्षेत्र से निकलकर विभिन्न क्षेत्र और फिर ज्ञान क्षेत्र (knowledge sector)  की ओर जा रही है। विज्ञान के क्षेत्र में पहिया, बिजली और वायुयान अद्भुत उपलब्धियां होगीं, मगर इंटरनेट अद्वितीय है। इसने राष्ट्र को भी पीछे छोड़ दिया है।

 

इसलिए आश्चर्य नहीं कि सन् 2010 में टाइम के पाठकों ने जुलियन असांजे को वर्ष का व्यक्तिचुना है।

mark-zukerberg  lary  wael_ghonim

सन् 2011 में टाइम ने विश्व के जिन 100 सर्वाधिक प्रभावशाली लोगों की सूची दी है, में न केवल विकीलीक्स के जुलियन असांजे को सम्मिलित किया गया है अपितु अन्य अनेक इंटरनेट एक्टिविस्ट जैसे फेसबुक के मार्क जुकेरबर्ग, गुगल के सीइओ लेटी पेज और गुगल के ही वाए.एच.घोनिम जिन्होंने ने मिस्र में लोकतांत्रिक आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई को इस आंदोलन में योगदान करने के लिए भी शामिल किया गया है।

 

लालकृष्ण आडवाणी

नई दिल्ली
3 मई, 2011

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