मुंबई पर 11/26 का हमला (वाशिंगटन की नजरों से)

October 24, 2010

नवम्बर के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत यात्रा पर आने वाले हैं। उनके आगमन से कुछ सप्ताह पूर्व, न्यूयार्क के एक मेरे मित्र ने द वाशिंगटन पोस्ट के एसोसिएट सम्पादक बॉब वुडवर्ड द्वारा लिखित पुस्तक ओबामास् वार्स(Obama’s Wars) मुझे भेजी है। मुझे स्मरण आता है कि मैंने उनकी पूर्ववर्ती पुस्तकें आल द प्रेसीडेंट्स मैन (All the President’s Men) और वाटरगेट काण्ड सम्बन्धी द फाइनल डेज़ (The Final Days) और अमेरिका पर 9/11 के आतंकवादी हमले से सम्बन्धित बुश एट वार (Bush at War) भी पढ़ी हैं। वाटरगेट और 9/11 के आतंकवादी हमले पर वुडवर्ड की रिपोर्टिंग ने उन्हें दो बार पुल्त्जिर पुरस्कार दिलाया है।

 

वुडवर्ड ने अपनी नवीनतम पुस्तक में इन तीन युध्दों के बारे में लिखा है : इराक में, अफगानिस्तान में और आतंक के विरुध्द।

 

इन तीनों में से अंतिम दो का भारत के हितों के साथ सीधा सम्बंध है और इसलिए एक सूक्ष्म दृष्टि वाले लेखक जिनका राष्ट्रपति ओबामा के साथ अनेकों बार संवाद हो चुका है और जिनकी पहुंच अनेक गुप्त दस्तावेजों तक है, द्वारा लिखी गई पुस्तक में उनका दृष्टिकोण वाशिंगटन की सोच का बहुमूल्य संकेतक होगा, भले ही उसकी कुछ ताजा कार्रवाई इसके विपरीत दिखती होगीं।

 

अपने राष्ट्रपतीय काल के अंतिम दिनों में राष्ट्रपति बुश ने अफगानिस्तान में युध्द के उपप्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के लेफ्टिनेंट जनरल डगल्स ल्युटे से वहां की सत्य रिपोर्ट देने को कहा।

 

और ल्युटे ने राष्ट्रपति को जो रिपोर्ट सौपीं वह चापलूसी से कोसों दूर थी। पुस्तक में एक पैराग्राफ में अफगान युध्द के बारे में अमेरिकी मुख्य गलतियों को सार रुप में इस प्रकार दिया गया है:

 

जैसाकि ल्युटे ने वहां की स्थिति का परीक्षण किया, उन्होंने पाया कि 10 विभिन्न लेकिन एक साथ युध्द लड़े जा रहे हैं। पहला, नाटो क्षेत्र के प्रभारी कनाडा के एक जनरल द्वारा परम्परागत युध्द लड़ा जा रहा है। दूसरा, सीआईए अपना गुप्त अर्ध्दसैनिक युध्द संचालित कर रहा है। ग्रीन बेरेट्स और ज्वाइंट स्पेशल आपॅरेशन कमाण्ड-प्रत्येक का अपना युध्द है, बड़े लक्ष्यो को खोज निकालना। टे्रनिंग एण्ड इक्यूपमेंट अपने ऑपरेशन चला रही है। अफगान नेशनल आर्मी, अफगान नेशनल पुलिस और सीआईए द्वारा प्रायोजित गुप्तचर एजेंसी अफगान नेशनल डायरेक्टोरेट फॉर सिक्युरिटी भी अपने-अपने-अपने अलग युध्द लड़ रहे है।

 

वुडवर्ड के अनुसार रिपोर्ट अफगानिस्तान के बजाय  पाकिस्तान को कहीं ज्यादा रणनीतिक मुसीबत वाली समस्या के रुप में चिन्हित करती है, क्योंकि वहां पर अलकायदा और अन्य सम्बध्द गुटों के अड्डे अमेरिका के लिए ज्यादा खतरा है।

 

25 नवम्बर, 2006 को बुश ने इस अत्यन्त गुप्त और परेशानी वाले दस्तावेज पर विचार करने के लिए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई और जो सर्वसम्मत निर्णय लिया गया वह था: यह दस्तावेज जारी नहीं किया जाना चाहिए। वुडवर्ड अपनी पुस्तक में दर्ज करते हैं कि जब इस रिपोर्ट पर अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा विचार किया जा रहा था तब ”10 बंदूकधारी भारतीय शहर मुंबई में घूम रहे थे, प्रत्यक्ष रुप से 15 मिलियन लोगो को बंधक बनाने के लिए।

 

वुडवर्ड लिखते हैं, ”इन बंदूकधारियों ने जो अराजकता और हिंसा फैलाई वह लगभग 60 घंटे टेलीविज़नों पर देखी गई। 9/11 हमले के बाद से इसके अलावा आतंकवादी नाटक कुछ और नहीं हो सकता था।

 

11/26 के मुंबई हमले की योजना और उसे अमल में लाने का काम लश्करे-तोयबा ने किया जोकि सामान्य रुप से एलईटी के रुप से जानी जाती है। लश्करे-तोयबा के गठन से लेकर उसे धन मुहैया कराने का पाकिस्तानी आईएसआई द्वारा किया जाता है। आईएसआई के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शुजा पाशा ने वाशिंगटन के सामने स्वीकारा है कि आईएसआई से सम्पर्क वाले दो सेवानिवृत पाक सैन्य अधिकारी मुंबई हमले में शामिल थे। लेकिन उन्होंने जोर दिया कि यह एक अलग से किया गया ऑपरेशन था न कि अधिकृत तौर पर। पाशा ने कहा हो सकता है कि मेरे संगठन से जुड़े कुछ लोग इससे जुड़े थे। लेकिन यह अधिकृत, निर्देश और नियंत्रण से अलग थे।

 

बाद में सीआईए को विश्वसनीय गुप्तचर रिपोर्ट मिली कि आईएसआई सीधे तौर पर मुंबई के प्रशिक्षण से जुड़ी थी।

 

वुडवर्ड ने 11/26 पर अध्याय को इस प्रकार समाप्त किया :

 

योजना और लागू करना, कम लागत वाले, और सर्वाधिक अत्याधुनिक संचार प्रणाली जिसका एलईटी ने उपयोग किया सभी दिक्कत देने वाले हैं। हमलावर आसानी से अर्जित किए जाने योग्य ग्लोबल पोजिशिनिंग उपकरण, गूगल अर्थ मैप्स और व्यवसायिक रुप से उपलब्ध एन्क्रिप्शन उपकरण और रिमोर्ट कंट्रोल ट्रिगर-के सहारे रहे।

 

वे पाकिस्तान में बैठे संचालकों से सैटेलाइट फोन से बात करते रहे जो वॉयस ओवर प्रोटोकॉल (वीओआईपी) के जरिए न्यू जर्सी की फोन सेवा थी, ने इन कॉल के असली गंतव्य को पता करने को असंभव तो नही मगर मुश्किल बना दिया था ताकि पता न चले कहां से बातें हो रहीं हैं। 

 

कम लागत, उच्च तकनीक वाले इस ऑपरेशन जिसने मुंबई को पंगु बना दिया से एफबीआई दहल गई। अमेरिका के शहर भी इसी तरह असुरक्षित हैं। अमेरिका में ऐसे ही हमले को निष्फल बनाने वाले एक वरिष्ठ एफबीआई अधिकारी ने कहा मुंबई ने सभी चीजों को बदल दिया है।

 

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अफगानिस्तान और पाकिस्तान में युध्दों की रणनीति की समीक्षा करने के लिए ओबामा ने सीआईए के एक पूर्व विश्लेषक बु्रश ओ. राइडेल को प्रभारी बनाया। उसने जो रणनीतिक पेपर तैयार किया उसे वाशिंगटन के क्षेत्रों में सामान्य रुप से राइडेल रिव्यू डाक्यूमेंट (Riedel Review document) के रुप से जाना जाता है।

 

राइडेल ने राष्ट्रपति को बताया है कि फोकस अफगानिस्तान से दूर पाकिस्तान की तरफ अवश्य रुप से परिवर्तित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवादियों से अपने मनोभाजित सम्बन्धों को समाप्त करना चाहिए जिसमें वे संरक्षक और पीड़ित और उसी समय सुरक्षित ठिकानों में हैं।

 

ओबामास वार्स अनेक बिंदुओं पर विवेचन करती है कि यदि 9/11 जैसा आतंकवादी हमला फिर से हो गया तो क्या होगा। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने जो सैन्य तैयारी योजना विचारी, उसे वाशिंगटन ने एक प्रतिशोधी योजना(A Retribution Plan) नाम दिया है। इस योजना के अंतर्गत अमेरिका सभी ज्ञात अलकायदा के अड्डो या अमेरिकी गुप्तचर डाटाबेस में वर्णित प्रशिक्षण शिविरों पर या तो बम डालेगा अथवा हमला करेगा।

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बॉब वुडवर्ड की नवीनतम पुस्तक बताती है कि 9/11 मुख्य रुप से सऊदी और सोमालिया वालों का किया-कराया था, अब अलकायदा पश्चिमी यूरोप में लक्ष्यों को भेद रहा है और इसके लिए अलकायदा उन पाकिस्तानियों जो ब्रिटेन, नार्वे और डेनमार्क में बस चुके हैं को उपयोग में ला रहा है और जो हमारी स्क्रीनिंग तथा सुरक्षा जांच से बच सकें।

 

पिछले दिनों समाचार पत्रों की रिपोर्टिंग थी कि ओसमा बिन लादेन पाकिस्तान में है। वुडवर्ड लिखते हैं: बुश प्रशासन के प्रयासों के बावजूद-अत्यधिक चौकसी, बंदी और पूछताछ तकनीक-कोई भी बिन लादेन, उसके सहायक अयमान जवाहिरी या तालिबानी नेता मुल्ला उमर के बारे में बताने नहीं आया।

 

राइडेल ने चेतावनी दी है कि: यह तथ्य सुझाता है कि अलकायदा के बारे में जितना कहा जाता है, अब उससे ज्यादा अनुशासन है।

 

 

लालकृष्ण आडवाणी

नई दिल्ली

24 अक्टूबर, 2010

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