सच्चर कमेटी : गुजरात के मुस्लिमों के बारे में आंखें खोल देने वाले तथ्य

May 17, 2010

3 मई के अपने ब्लॉग में मैंने गुजरात के स्वर्ण जयंती समारोह के बारे में लिखा था। उसमें मैंने बताया था कि कैसे नरेन्द्रभाई मोदी ने एक प्रशासनिक कार्यक्रम को लोगों के कार्यक्रम में परिवर्तित कर और प्रत्येक नागरिक को, प्रत्येक क्षेत्र में गुजरात को एक आदर्श राज्य बनाने के संकल्प में सहभागी बनाने का गर्वोत्तम अवसर देकर अपने आप को एक अद्वितीय मुख्यमंत्री सिध्द किया है।

सामान्य तौर पर कहा जाए तो अब लोग यह स्वीकारने लगे हैं कि गुजरात में ईमानदार शासन और विकास हुआ है और नरेन्द्रभाई की उपलब्धियां विवादों से ऊपर हैं। पर प्रश्न यह उठता है कि राज्य में समुदायों के आपसी रिश्ते कितने सौहार्दपूर्ण हैं, विशेष रूप से राज्य में मुसलमान कितने खुश और संतुष्ट हैं।

सन् 2006 में प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह ने देश में मुसलमानों की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का विस्तृत अध्ययन करने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति पूर्व न्यायाधीश श्री राजेन्द्र सच्चर के नेतृत्व में गठित की थी।

सच्चर कमेटी ने सौंपे गए विषय का अध्ययन करके 400 पृष्ठों से ज्यादा की विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सोंपी, नीचे दिए आंकड़े सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में से हैं, जो निस्संदेह सिध्द करते हैं कि देश के अन्य भागों की तुलना में गुजरात में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मुसलमान शिक्षा, रोजगार और आमदनी के मामले में कहीं ज्यादा अच्छी स्थिति में हैं। इस बारे में प्रकाश डालते हुए कुछ निष्कर्ष प्रस्तुत किये जा रहे हैं:

साक्षरता के स्तर पर गुजरात में मुस्लिम राष्ट्रीय औसत 59.1 के मुकाबले 73.5 प्रतिशत पर है। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले साक्षर पुरूषों का राष्ट्रीय औसत 70 और ग्रामीण क्षेत्रों का 62 है जबकि गुजरात में यह क्रमश: 76 और 81 है। (सच्चर कमेटी रिपोर्ट: परिशिष्ट टेबल 4.1, पृष्ठ संख्या 287)

• यहां तक कि गुजरात के शहरी क्षेत्रों में रहने वाली मुस्लिम महिलाओं की साक्षरता औसत दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में 5 अंक अधिक है जबकि गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं की साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत 43 की तुलना में 57 प्रतिशत है। (सच्चर कमेटी रिपोर्ट: परिशिष्ट टेबल 4.1 बी पृष्ठ 289)

• इसी प्रकार गुजरात में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा स्तर के मामले में मुस्लिमों का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत और अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा ऊंचा है। राष्ट्रीय औसत 60.9 प्रतिशत (उत्तर प्रदेश में 42.2 प्रतिशत) की तुलना में प्राथमिक शिक्षा में मुस्लिमों का प्रतिशत 74.9 है जबकि माध्यमिक स्तर पर राष्ट्रीय औसत 40.5 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश के 29.2 प्रतिशत की तुलना में गुजरात में 45.3 प्रतिशत है। (सच्चर कमेटी रिपोर्ट: परिशिष्ट टेबल 4.6 एवं 4.7 पृष्ठ संख्या 295-296-297-298)

• गुजरात में माध्यमिक स्कूलों में 7 से 16 वर्ष के मुस्लिम बच्चों के औसत वर्ष 4.29 है जबकि राष्ट्रीय औसत 3.26 वर्ष है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार में यह क्रमश: 2.89, 2.60 और 2.07 वर्ष है। सच्चाई यह है कि गुजरात में मुस्लिम बच्चे भी अन्य बच्चों की तरह माध्यमिक स्कूलों तक पहुंचने में समान अवसरों से लाभान्वित हो रहे हैं। (सच्चर कमेटी रिपोर्ट: परिशिष्ट टेबल 4.2, पृष्ठ संत्र 290-291)

गुजरात में मुस्लिमों से जुड़ा दूसरा पहलू है उनकी अच्छी आर्थिक स्थिति। यहां पर भी सच्चर कमेटी बनी हुई धारणा को झुठलाती है।

• प्रतिमाह प्रति व्यक्ति आय के संदर्भ में, शहरी क्षेत्रों में मुस्लिम औसतन 875 रुपए कमाते हैं जोकि राष्ट्रीय स्तर के औसत 804 रुपए से ज्यादा है। यह उत्तर प्रदेश में 662 रुपए, पश्चिम बंगाल में 811 रुपए, पंजाब में 803 रुपए, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में 837 रुपए है। (सच्चर कमेटी रिपोर्ट: परिशिष्ट टेबल 4.2, पृष्ठ सं. 364)

• ग्रामीण गुजरात में भी यही स्थिति है कि वहां रहने वाले मुस्लिमों की प्रति व्यक्ति मासिक आय 20-25 प्रतिशत है जोकि अन्य राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मुस्लिमों से कहीं ज्यादा है। 553 रुपए के राष्ट्रीय औसत की तुलना में यह औसत 668 रुपए है। (सच्चर कमेटी रिपोर्ट: परिशिष्ट टेबल 8.3, पृष्ठ संख्या 365)

• गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के संदर्भ में, गुजरात में 1987-88 में मुस्लिमों का प्रतिशत 54 था जबकि 2004-05 में यह आंकड़ा 34 प्रतिशत पर पहुंच गया जोकि सुधार की दिशा में स्वस्थ कदम दर्शाता है। (सच्चर कमेटी रिपोर्ट: परिशिष्ट टेबल 8.5, पृष्ठ संख्या 367)

• यहां तक कि, राज्य के रोजगार में मुस्लिमों का हिस्सा यानि गुजरात में सरकारी नौकरियों में 5.4 प्रतिशत हिस्सा है जबकि यह पश्चिम बंगाल में 2.1 प्रतिशत, दिल्ली में 3.2 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 4.4 प्रतिशत है। (सच्चर कमेटी रिपोर्ट: परिशिष्ट टेबल 9.4, पृष्ठ संख्या 370)

कुल मिलाकर, यह सम्पूर्ण स्थिति इस दुष्प्रचार की कि गुजरात में मुस्लिमों के साथ अन्याय हो रहा है, को झूठा सिध्द करती है। सच्चर कमेटी द्वारा शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन यह पूर्णतया दर्शाता है कि शिक्षा के क्षेत्र में गुजरात के मुस्लिम अच्छे ढंग से प्रगति कर रहे हैं। उनके लिए अनेक अवसर उपलब्ध कराए गए हैं और उनकी देखभाल ठीक से की जा रही है। उनकी आर्थिक स्थिति सम्बंधी तथा इसी प्रकार की बनाई गई धारणा कि उनके साथ भेदभाव किया जाता है तथा उन्हें समान अवसरों से वंचित किया जाता है, की पोल भी खोलते हैं।

इस तथ्य की पुष्टि किसी और ने नहीं अपितु अहमदाबाद की जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती शब्बीर अहमद सिद्दीकी ने कुछ समय पहले यह कहकर की है कि : ”मोदी सरकार द्वारा सृजित शांतिपूर्ण वातावरण में मुस्लिमों को फलने-फूलने का अवसर मिला है। मोदी ने एक ऐसा माहौल उपलब्ध कराया है जो गुजरात में शांतिपूर्वक रहने वालों के लिए अनुकूल है।”

सच्चर कमेटी को गठित करने के पीछे सरकार की अपनी मंशाए थी। लेकिन कमेटी द्वारा एकत्रित किए गए। तुलनात्मक आंकडों पर दृष्टि डालने के बाद, मुझे लगता है कि गुजरात को न्यायाधीश सच्चर का कृतज्ञ होना चाहिए कि उन्होंने देशभर में यह सिध्द किया है कि नरेन्द्र भाई मोदी के शासन में मुस्लिम अन्य राज्यों की तुलना में गुजरात में कहीं ज्यादा अच्छी स्थिति में हैं।

लाल कृष्ण आडवाणी
नयी दिल्ली

17 मई, 2010

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*