Archive for March, 2009

The Seven Social Sins – By Mahatma Gandhi

Monday, March 30th, 2009 24
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1. Politics without principles
2. Wealth without work
3. Pleasure without conscience
4. Knowledge without character
5. Commerce without morality
6. Science without humanity
7. Worship without sacrifice.

सात सामाजिक पापकर्म : महात्मा गांधी

1       सिध्दांतों के बिना राजनीति
2       काम के बिना धन
3       विवेक के बिना सुख
4       चरित्र के बिना ज्ञान
5       नैतिकता के बिना व्यापार
6       मानवता के बिना विज्ञान
7       त्याग के बिना पूजा Click to Read More

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The Hour of God – By Yogi Aurobindo

Friday, March 27th, 2009 5
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yogi_aurobindoThere are moments when the Spirit moves among men and the breath of the Lord is abroad upon the waters of our being; there are others when it retires and men are left to act in the strength or the weakness of their own egoism. The first are periods when even a little effort produces great results and changes destiny; the second are spaces of time when much labour goes to the making of a little result. It is true that the latter may prepare the former, may be the little smoke of sacrifice going up to heaven which calls down the rain of God’s bounty. Unhappy is the man or the nation which, when the divine moment arrives, is found sleeping or unprepared to use it, because the lamp has not been kept trimmed for the welcome and the ears are sealed to the call. But thrice woe to them who are strong and ready, yet waste the force or misuse the moment; for them is irreparable loss or a great destruction. In the hour of God cleanse thy soul of all self-deceit and hypocrisy and vain self-flattering that thou mayst look straight into thy spirit and hear that which summons it.

All insincerity of nature, once thy defence against the eye of the Master and the light of the ideal, becomes now a gap in thy armour and invites the blow. Even Click to Read More

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लाडली लक्ष्मी योजना : हम इसका राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन करेंगे और भारत की हर बच्ची को ”लखपति” बनायेंगे

Wednesday, March 18th, 2009 20
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हाल ही में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर मेरी टीम ने जिस रचनात्मक तरीके से वेबसाइट पर शुभकामना संदेश दिया था, उसे लोगों ने काफी सराहा। सामान्य तौर पर दिखाए जाने वाले बैनर के बदले तीन स्क्रीन बारी-बारी से दिखाए गए। पहला, ‘नारी तुम श्रध्दा हो’ दूसरा ‘नारी तुम संस्कार हो’ और तीसरा ‘नारी तुम शक्ति हो’। यह विचार प्रसिध्द हिन्दी कवि श्री जयशंकर प्रसाद की कविता से प्रेरित था-

नारी! तुम केवल श्रध्दा हो,
विश्वास-रजत-नग पल तल में,
पीयूष श्रोत सी बहा करो
जीवन की सुन्दर समतल में

‘श्रध्दा’, ‘संस्कार’ और ‘शक्ति’ ये तीन शब्द नारी और Click to Read More

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जेल से लेकर फ्रीडम पार्क तक : मेरे जीवन के एक यंत्रणापूर्ण और रोचक अनुभव वाले स्थान की पुन: यात्रा

Wednesday, March 18th, 2009 2
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मैं तीन दिनों से लगातार यात्रा कर रहा हूं। ये स्थान क्रमश: गोरखपुर (उत्तर प्रदेश; 15 फरवरी), मदनपल्ली (आन्ध्र प्रदेश; 27 फरवरी) और बीदर (कर्नाटक; 28 फरवरी) हैं जहां मैंने 31वीं, 32वीं और 33वीं विजय संकल्प रैलियों को सम्बोधित किया। मेरी पार्टी ने मुझसे औपचारिक चुनाव अभियान से पहले एक बड़े सम्पर्क कार्यक्रम के रूप में पूरे देश की यात्रा करने के लिए कहा और फरवरी 2008 में जबलपुर में मेरी पहली विजय संकल्प रैली का आयोजन हुआ। मैंने व्यावहारिक तौर पर देश के प्रत्येक हिस्से-अरूणांचल प्रदेश में पासीघाट से लेकर केरल में कालीकट (कोझीकोड़े) और झारखंड में दुमका से लेकर महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र Click to Read More

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Ladli Laxmi Yojana: We’ll implement it nationwide and make every girl child a ‘Lakhpati’

Monday, March 16th, 2009 103
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My website received a lot of appreciation for the creative manner in which our team presented the message of greetings on March 8, International Women’s Day. The usual masthead of the website was replaced with three alternating screens, the first saying “Naari Tum Shraddha Ho” (Woman, you are Devotion); the second saying, “Naari Tum Samskaar Ho” (Woman, you are Culture); and the third saying, “Naari Tum Shakti Ho” (Woman you are Strength). The idea was inspired by the famous lines by renowned Hindi poet Jayashankar Prasad:

Nari! Tum keval shraddha ho,
Vishwas-rajat-nag-pal-tal mein,
Piyush srot si baha karo,
Jeevan ki sundar samtal mein.

(Oh woman! you are devotion personified
Under the silver mountain of faith,
Flow you, like a river of ambrosia
On this beautiful earth.)

“Shraddha”, “samskaar” and “shakti” — these three words capture some of the greatest attributes of women in general, and Indian women in particular. Nevertheless, it pains my heart when I look at the statistics about the development status of women in India.

• Female life expectancy: 64.6 years.
• Infant mortality: 57 per 1000 Click to Read More

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लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता श्री लालकृष्ण आडवाणी द्वारा छठी पोस्ट

Monday, March 2nd, 2009 15
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क्यों सरकार द्वारा नवीन चावला के बारे में मुख्य चुनाव आयुक्त
की सिफारिश को स्वीकार किया जाना चाहिए

चुनाव आयुक्त श्री नवीन चावला के सम्बन्ध में उठे वर्तमान विवाद से मुझे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन सरकार के शासनकाल में बेनजीर भुट्टो से उनकी दिल्ली यात्रा के दौरान हुई बातचीत का स्मरण हो आया है। उस दिन उन्होंने मेरे साथ लंच किया था और वे सिन्धी कड़ी के एक स्वादिष्ट व्यंजन जिसे मेरी पत्नी कमला बहुत अच्छे ढंग से बनाती है, पर मुझसे बात कर रही थीं।
लंच करने के बाद हुई हमारी गपशप के दौरान मैंने बेनजीर से एक प्रश्न किया ”यह कैसे है,” कि ”यद्यपि भारत और पाकिस्तान Click to Read More

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राष्ट्रीय पहचान का अन्तर्राष्ट्रीय सन्देश

Monday, March 2nd, 2009 3
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मैं सन् 1970 में संसद के लिए चुना गया था। मेरा पहला विदेशी दौरा सन् 1972 में चेकोस्लोवाकिया जाने वाले संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में हुआ था। लोकसभा अध्यक्ष श्री गुरदयाल सिंह ढिल्लों उस प्रतिनिधिमंडल के नेता थे।

उन दिनों चेकोस्लोवाकिया समाचारों में बहुत ज्यादा छाया हुआ था। सन् 1965 में अलेक्जेंडर डयूबेक द्वारा चेकोस्लोवाक कम्युनिस्ट पार्टी का नेतृत्व संभालने के बाद, पार्टी की घरेलू नीति में जबरदस्त बदलाव लाने और लोगों को एक स्थान पर एकत्र होने तथा बोलने की स्वतंत्रता प्रदान करने और गुप्त पुलिस पर कठोर प्रतिबंध लगाने के अधिकार को बहाल करने की परिकल्पना की Click to Read More

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सही सेक्यूलरिज्म को समझना

Monday, March 2nd, 2009 3
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इस सप्ताह मेरे पुस्तकालय में एक और महत्वपूर्ण पुस्तक-अमित मेहरा द्वारा लिखित एक सुन्दर कॉफी टेबल बुक India : A timeless Celebration जुड़ गई है। मैं इस महत्वपूर्ण पुस्तक को प्रकाशित करने के लिए विदेश मंत्रालय के पब्लिक डिप्लोमेसी डिवीजन को बधाई देता हूं।

अमित मेहरा एक उत्कृष्ट फोटोग्राफर हैं। वे कई विख्यात पत्र-पत्रिकाओं जैसे- टाइम, इंडिया टुडे, डेर स्पेजेल, फॉरच्यून, वॉग (vogue) आदि में योगदान देते रहे हैं। अमितदास गुप्ता की प्रस्तावना और जया रामनाथान द्वारा मेहरा के फोटोग्राफ्स के संदर्भ में लिखित टिप्पणियां पढ़ने योग्य हैं।

समकालीन इंगलिश की लांगमैन डिक्शनरी के अनुसार – Click to Read More

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स्वामी रंगनाथानंद के श्रीचरणों में

Monday, March 2nd, 2009 1
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मित्रो, मेरी उद्धाटन पोस्ट पर दी गई उत्साहजनक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद।

मैं सोच रहा था कि आज मैं आप लोगों के समक्ष कौन-से विचार रखूं क्योंकि आपके साथ बांटने के लिए मेरे पास बहुत से विचार हैं। 15वीं लोकसभा के लिए चुनाव काफी नजदीक आ गए हैं। स्वाभाविक है कि मेरा अधिकांश संवाद राजनैतिक और चुनावी होगा। फिर भी, मैं यह मानता हूं कि राजनीति हमारे राष्ट्रीय जीवन का अंतिम परिणाम नहीं है बल्कि राजनीति सार्वजनिक जीवन में हर कहीं तभी सार्थक तथा परिपूर्ण होती है जब वह भारत की आध्यात्मिक परम्परा में निहित मूल आदर्शों तथा उच्च मूल्यों द्वारा निर्देशित हो। ऐसा बहुत कुछ है जिसे Click to Read More

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गुजरात कैसे ‘जीवन्त’ (वॉयब्रेंट) बना

Monday, March 2nd, 2009 0
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मकर संक्रांति (14 जनवरी) हमारे देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग नामों से जानी जाती है। तमिलनाडु में यह त्योहार पोंगल के नाम से मनाया जाता है। असम में यह बीहू के नाम से गीत, नृत्य और हर्षोंल्लास के साथ मनाया जाता है। पंजाब और उत्तर भारत के कई भागों में यह त्योहार एक या दो दिन पहले मनाया जाता है। जिसे लोग लोहड़ी कहते हैं। ठंडी रात के समय लोग इकट्ठे होकर लकड़ियों के ढेर बनाकर उसे जलाते हैं, लोहड़ी के गीत गाते हैं, रेवड़ी, मूंगफली, पॉपकॉर्न और तिल की बनी मिठाईयां आपस में बांटते हैं। प्रति वर्ष मेरा परिवार लोहड़ी का त्योहार अपने आवास पर दोस्तों, कार्यालय के सहयोगियों और Click to Read More

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