Month: August 2010

एक न भूलने वाली घटना

August 2, 2010

मुंबई, जेहादी आतकवादियों का पसंदीदा निशाना रहा है। आखिरकार यह देश की राजधानी जो है। दो वर्ष पूर्व से उन्होंने अपना ध्यान बंगलौर की तरफ किया है जो भारत का तेजी से विकसित हो रहा आई.टी.-सूचना प्रोद्योगिकी- का केन्द्र है। जुलाई, 2008 में इस शहर में श्रृंखलाबध्द बम विस्फोट हुए थे। मुझे स्मरण है कि इसके तुरंत बाद मैंने शहर का दौरा किया था और उन सभी स्थानों पर गया जहां-जहां बम विस्फोट हुए थे और अंत में अस्पताल गया जहां सैकडों बम विस्फोट से पीड़ित लोगों का उपचार हो रहा था। पुलिस जांच से संकेत मिले कि बंगलौर ऑपरेशन केरल के अब्दुल नसीर मदनी के दिमाग की उपज था और जिसे

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Reminiscing Indonesia and the Idea of a Mini-Bharat

August 1, 2010

BJP Deputy Leader in the Rajya Sabha, Surinder Singh Ahluwalia, has received a letter from Dr. Mahinder Singh, a friend of his in Bahrain, expressing immense satisfaction about the blog I had written a fortnight back about Indonesia. Dr. Mahinder Singh has actually enclosed a copy of the blog also to Ahluwalia, saying that he found the piece so “interesting and informative” that he had sent copies of it to numerous “friends all over the world.” Responses to that blog which have come directly to my office are equally appreciative. As I had mentioned, I visited only Jakarta and Bali. Both places are situated in the island of Java. I wish I had also gone to Yogyakarta (pronounced Jogjakarta) about which it is often said: “If Jakarta is Java’s financial and industrial powerhouse, Yogyakarta is its soul”. I could not visit Yogyakarta. I was told about the Prambanan Temples there. … Continue reading Reminiscing Indonesia and the Idea of a Mini-Bharat

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इण्डोनेशिया की यादें और एक लघु भारत की परिकल्पना

August 1, 2010

राज्यसभा में भाजपा के उपनेता सुरिन्दर सिंह अहलूवालिया को बहरीन से उनके एक मित्र डा. महिन्दर सिंह का पत्र प्राप्त हुआ जिसमें उन्होंने एक पखवाड़े पूर्व इण्डोनेशिया के बारे में लिखे गए मेरे ब्लॉग पर बहुत संतोष व्यक्त किया है। वास्तव में डा. महिन्दर सिंह ने पत्र के साथ इस ब्लॉग की प्रति अहलूवालिया को भेजी है; साथ में कहा कि उन्हें यह लेख इतना ‘रोचक और शिक्षाप्रद’ लगा कि उन्होंने बड़ी मात्रा में ‘दुनिया भर में अपने मित्रों’ को इसकी प्रति भेजी है। इस ब्लॉग पर सीधे मेरे कार्यालय में आई प्रतिक्रियाएं भी समान रुप से उत्साहवर्धक हैं। जैसा मैंने उल्लेख किया था कि

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