Archive for February, 2011

भ्रष्टाचार का मुद्दा परिवर्तन का उत्प्रेरक बन सकता है

February 21, 2011
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भारत को स्वतंत्र हुए अब छ: दशक से ज्यादा हो गए। पहले तीन दशकों में कांग्रेस पार्टी का प्रभुत्व राजनीतिक परिदृश्य पर विशालकाय की भांति छाया रहा। अनेक राज्यों में यह सत्ता में थी। लोकसभा में, गैर -कांग्रेस दल इतनी संख्या नही जुटा पाए थे कि उन्हें मान्यता प्राप्त विपक्ष का पद मिलता और इसके नेता, नेता विपक्ष बन पाते।   सत्तार के दशक के मध्य में गुजरात में भ्रष्टाचार के विरुध्द एक सशक्त विद्यार्थी आंदोलन उभरा। इससे प्रेरित होकर जयप्रकाशजी ने भी बिहार में भ्रष्टाचार के विरुध्द विद्यार्थियों को जुटाया। इसी अभियान ने जे0पी0 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के करीब लाया  और उसके माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के। इसके अलावा चुनाव सुधारों में उनकी रुचि के चलते मैं उनसे अलग से मिलता रहता था। उन दिनों वह दोहराते थे कि सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार की जड़ें कांग्रेस सरकारों के अपने भ्रष्टाचार में है। जब तक विपक्षी दल … Continue reading भ्रष्टाचार का मुद्दा परिवर्तन का उत्प्रेरक बन सकता है

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पाकिस्तान के बारे में एक उत्कृष्ट पुस्तक

February 14, 2011
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विगत् तीन दशकों में मैंने असंख्य पुस्तक विमोचन कार्यक्रमों में भाग लिया है। पुस्तक विमोचन से पूर्व अपनी शुरुआती टिप्पणियों में अक्सर मैं यह कहता हूं कि आपातकाल के उन्नीस महीने जो मैंने बंगलूर सेंट्रल जेल और कुछ रोहतक जेल में बिताए, उस समय सलाखों के पीछे बंद सभी राजनीतिक बंदियों के लिए ‘रिलीज‘ (छूटना) शब्द आनन्ददायक होता था। 18 जनवरी, 1977 में मेरी रिहाई जोकि 26 जून, 1975 में गिरफ्तारी के बाद हुई थी। अत: जब भी किसी लेखक मुझे अपनी पुस्तक ‘रिलीज‘ करने का अनुरोध किया तो शायद ही मैंने उसे निराश किया हो।   एक महीना पूर्व मुझे एक अत्यन्त प्रभावी पुस्तक के विमोचन में भाग लेने का मौका मिला जिसमें उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने एम.जे. अकबर की पुस्तक टिंडरबॉक्स (Tinderbox) विमोचित की। पुस्तक का उप शीर्षक है: ‘पाकिस्तान का अतीत और भविष्य‘ (The Past and Future of Pakistan) सम्मानीय अंसारी ने स्वंय पुस्तक को ‘श्रेष्ठ एम.जे. … Continue reading पाकिस्तान के बारे में एक उत्कृष्ट पुस्तक

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A BRILLIANT BOOK ON PAKISTAN

February 13, 2011
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In the past three decades I have attended numerous book release functions. In my preamble to the comments I have been making on the book to be launched I have often remarked that during the nineteen months of the infamous Emergency (1975-77) which I spent mainly in the Bangalore Central Jail, and briefly in the Rohtak Jail, the one word that used to bring great cheer to all the political prisoners behind bars was the word ‘release’. So, since my own release on 18th January, 1977 – arrest was on 26th June 1975 – whenever I have been approached by an author with the request to ‘release’ his book, I have rarely disappointed him.   One of the most impressive book release functions I have participated in was a couple of months back when Vice President Hamid Ansari launched M.J. Akbar’s TINDERBOX. The book has been subtitled ‘The Past and … Continue reading A BRILLIANT BOOK ON PAKISTAN

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