Archive for October, 2011

U.P.A. AND LEMMINGS

October 3, 2011
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At the valedictory session of the BJP National Executive in New Delhi last weekend, I referred to the Prime Minister’s comment about the opposition becoming impatient to see the UPA Government’s ouster in order to have an early poll. I said that in the country today, not only in the media, but also among the people, opinion is unanimous that the UPA. Government is in an unenviable mess. This fact is also widely recognised that the mess is of the Congress’s own making. I described the UPA Government as being ‘in a suicidal mode.’   I can never forget the six-seven months period just before the formation of the BJP in April, 1980.  Before that we were part of the Janata Party. At that time I had said publicly about my own party that we are in a suicidal mood.   In one of the pieces I wrote those days … Continue reading U.P.A. AND LEMMINGS

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यू0पी0ए0 और लेम्मिंग्स्

October 3, 2011
No

गत् सप्ताह नई दिल्ली मे सम्पन्न भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के समापन सत्र में मैंने प्रधानमंत्री की इन टिप्पणियों का हवाला दिया कि विपक्ष यूपीए सरकार को गिराने के लिए उतावला हो रहा है ताकि शीघ्र चुनाव कराए जा सकें। मैंने कहा कि आज देश में न केवल मीडिया अपितु लोगों के बीच यह सर्वसम्मत मत बना हुआ है कि यूपीए सरकार अवांछनीय गड़बड़ी में फंसी हुई है। यह तथ्य भी सर्वविदित है कि यह गड़बड़ी कांग्रेस की अपनी बनाई हुई है। मैंने यूपीए सरकार को ‘आत्महत्या पर उतारू‘ रूप में वर्णित किया।   भाजपा के गठन से पहले के 6-7 महीनों की अवधि को मैं कभी नहीं भुला सकता। उससे पूर्व हम जनता पार्टी के घटक थे। उस समय मैंने अपनी स्वयं की पार्टी के बारे में सार्वजनिक रूप से कहा था कि हम आत्महत्या पर उतारू हैं।   उन दिनों के लिखे गए एक लेख में मैंने स्केंडिनवियन … Continue reading यू0पी0ए0 और लेम्मिंग्स्

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