Archive for January, 2012

AN UNFORGETTABLE ANNIVERSARY

January 22, 2012
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Last week I was in Chennai along with Narendra Modi to participate in Tamil magazine Tughlak’s anniversary function. And what a function it was! Few other journals can draw such large crowds. If Tughlak is a household name in Chennai, Cho Ramaswami also is a name well known and well respected among intellectuals all over the country.   In Cho, we find perfect harmony between Tamil pride and unflinching Indian nationalism.    Tughlak was launched more than four decades back on Pongal Day. So this year’s 14th January was Tughlak’s 42nd Annual Day.   I cannot think of any other journalist who has employed the power of humour and sarcasm to convey serious thoughts so effectively as Cho has always done, both through his writings as well when he speaks.   At this programme, for instance, where he spoke before Narendra Bhai and I did, his nearly forty minutes long … Continue reading AN UNFORGETTABLE ANNIVERSARY

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एक युगान्तरकारी प्रकाशन

January 22, 2012
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श्री आर. के. मेहरा, उनके सुपुत्र कपिश मेहरा और रुपा पब्लिकेशनस् द्वारा 11 खण्डों के ‘इनसायक्लोपीडिया ऑफ हिंदुज्म‘ का प्रकाशन करने पर हार्दिक अभिनन्दन, जिसे ‘हिन्दुस्तान टाइम्स‘ में समीक्षक इंद्रजीत हाजरा ने ‘विचारों के इतिहास और उसकी गहराई में रुचि रखने वालों के लिए यह आश्चर्यों से भरा खजाना है‘ के रुप में वर्णित किया है।   हाजरा ने आर.के. मेहरा द्वारा उन्हें बताए गए इस कथन को उद्वृत किया है कि वह इनसाक्लोपीडिया को ”अपने कैरियर का सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रकाशन” मानते हैं। ‘हिन्दुस्तान टाइम्स‘ ने इस समीक्षा को इस प्रमुख शीर्षक के साथ प्रकाशित किया है: ‘हिन्दुज्म एक बौध्दिक पद्वति है, रिलीजन नहीं‘ (Hinduism is an Intellectual System, not a Religion).   उपरोक्त शीर्षक इन खण्डों को सम्पादित संग्रहित और सभी की प्रूफ रीडिंग करने वाले डा. कपिल कपूर की टिप्पणियों में से लिया गया है। जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डा. कपूर इसके मुख्य सम्पादक हैं।   … Continue reading एक युगान्तरकारी प्रकाशन

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एक अविस्मरणीय वर्षगांठ

January 22, 2012
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पिछले सप्ताह मैं नरेन्द्र मोदी के साथ चेन्नई में तमिल पत्रिका ‘तुगलक‘ के वार्षिक कार्यक्रम में भाग लेने गया था। क्या था! कुछ अन्य ही पत्रकार शायद इतने लोग जुटा सकते हैं। यदि चेन्नई में ‘तुगलक‘ घर-घर में जाना जाने वाला नाम है। तो चो रामास्वामी देशभर के बुध्दिजीवियों में सुप्रसिध्द और आदरणीय नाम है।   चो में हमें तमिल अस्मिता और अदम्य भारतीय राष्ट्रवाद का पूर्ण संगम देखने को मिलता है।   चार दशक पूर्व पोंगल के दिन तुगलक का प्रकाशन शुरु हुआ था। इस प्रकार इस वर्ष 14 जनवरी को तुगलक का 42वां स्थापना वर्ष था।   मैं किसी और पत्रकार के बारे में ऐसा नहीं सोच सकता जैसेकि चो के बारे में है कि उनमें व्यंग्य और कटाक्ष की शक्ति से अपने लेखन और बोलने में गंभीर विचारों को भी प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने की कला है।   उदाहरण के लिए कार्यक्रम में भी वह नरेन्द्र … Continue reading एक अविस्मरणीय वर्षगांठ

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