Month: July 2013

डा. श्यामा प्रसाद की जयंती

July 7, 2013

आज 6 जुलाई, हमारी पार्टी भारतीय जनसंघ जो अब भारतीय जनता पार्टी के रुप में सक्रिय है, के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुकर्जी की जयंती है। यह ब्लॉग कल जारी होना है।   मैंने स्मरण दिलाया था कि कैसे 1952 की 23 जून को कानपुर में सम्पन्न भारतीय जनसंघ के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन में डा. मुकर्जी ने, देश के सभी भागों से आए जनसंघ के प्रतिनिधियों को जम्मू एवं कश्मीर के भारत में पूर्ण एकीकरण के बारे में अपने आव्हान से प्रेरित किया था। आखिर क्यों इस प्रदेश की स्थिति उन अन्य 563 देसी रियासतों से अलग होनी चाहिए जिन्होंने स्वतंत्र भारत में पूरी तरह से एकीकरण करना स्वीकार किया।   जनसंघ के सम्मेलन ने जम्मू एवं कश्मीर सरकार द्वारा लागू किए गए परमिट सिस्टम के विरुध्द एक आन्दोलन छेड़ने का फैसला किया। डा. मुकर्जी ने घोषणा की कि वे इस सिस्टम की अवज्ञा करने वाले पहले नागरिक होंगे और … Continue reading डा. श्यामा प्रसाद की जयंती

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ए व्यू फ्राम दि रायसीना हिल : अत्यन्त सुन्दर ढंग से लिखी गई पुस्तक

July 4, 2013

6 जुलाई को पूरे देश में डा. श्यामा प्रसाद मुकर्जी की जयंती मनाई गई।   उस शाम मैंने राष्ट्रीय संग्रहालय सभागार में एक पुस्तक: ”जम्मू-कश्मीर की अनकही कहानी” का लोकार्पण किया।   मेरे जैसे लाखों पार्टी कार्यकर्ता सही ही गर्व करते हैं कि हम एक ऐसी पार्टी से जुड़े हैं जिसका पहला राष्ट्रीय आंदोलन राष्ट्रीय एकता के मुद्दे पर हुआ और राष्ट्रीय एकात्मता के लिए ही हमारी पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष ने अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। लेकिन हममें से अनेक को यह शायद जानकारी न हो कि हमने जो देशव्यापी संघर्ष शुरु किया था, वह जम्मू-कश्मीर में जनसंघ के 1951 में जन्म से पूर्व ही एक क्षेत्रीय पार्टी-प्रजा परिषद ने शुरु किया था जिसका नेतृत्व पण्डित प्रेमनाथ डोगरा के हाथों में था। प्रजा परिषद के संघर्ष और त्याग की अनकही कहानी को देश के सामने लाने के लेखक के निर्णय की मैं प्रशंसा करता हूं।   यह उल्लेखनीय है … Continue reading ए व्यू फ्राम दि रायसीना हिल : अत्यन्त सुन्दर ढंग से लिखी गई पुस्तक

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THE ‘OPERATION POLO’ IN HYDERABAD

July 2, 2013

My last two blogs have been principally about Jammu and Kashmir State and about Dr. Syama Prasad Mookerjee, hailed by the country as ‘Independent India’s first martyr for national integration.’ For these two pieces I had relied greatly on V. Shankar’s two volume biography of Vallabhbhai Patel, captioned My Reminiscences of Sardar Patel.   Rajmohan Gandhi’s biography of Sardar Patel notes: “While Shankar’s services were valuable, a more significant role was played by Vapal Pangunni Menon.”   It was Sardar Patel who as free India’s Home Minister decided to create within his Ministry a States Department entrusted with the responsibility of integrating with the country the 564 princely states. Sardar Patel nominated V.P. Menon as Secretary of the States Department. When the Britishers ruled India, these princely states in area constituted nearly half the country.   At a function organised in New Delhi in December, 2000 by Capt. C.P. Krishna … Continue reading THE ‘OPERATION POLO’ IN HYDERABAD

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