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चुनाव अभियान : पर्चे (हैंडबिल) से लेकर इंटरनेट तक

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मित्रो, मेरे ब्लॉग में आपका स्वागत है। मेरे युवा सहयोगियों ने जिन्होंने इस वेबसाइट को तैयार किया है, मुझसे कहा कि राजनीतिक पोर्टल बगैर ब्लॉग के उसी प्रकार है जिस प्रकार बगैर हस्ताक्षर के पत्र होता है। मैंने उनके इस अकाटय तर्क को तुरन्त स्वीकार कर लिया।

इंटरनेट का उपयोग राजनीतिक संवाद के मंच के रूप में और खासकर, चुनाव प्रचार के लिए प्रयोग किए जाने के विचार से मैं काफी उत्साहित हूं। मुझे सन् 1952 के प्रथम आम चुनाव से लेकर आज तक हर चुनाव में प्रत्याशी या प्रचारक के तौर पर शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इस दौरान मैंने संवाद के तौर-तरीकों को विकसित होते देखा है। जहां तक संवाद का सम्बन्ध है, मैं प्रौद्योगिकी (टेक्नालॉजी) का हिमायती हूं। मैं सीधे तौर पर यह मानता हूं कि कोई भी चीज जो काम की है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। मैंने छह दशक के अपने लम्बे राजनीतिक जीवन में सभी प्रकार की नयी संवाद टेक्नोलॉजी को अपनाया है-कैसियो की डिजीटल डायरी से लेकर आई-पॉड और आई फोन तक।

पहले आम चुनाव में, जब मैं 25 वर्ष का था, मैंने भारतीय जनसंघ के लिए राजस्थान में एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में प्रचार किया था। जनसंघ की स्थापना डा0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा उससे एक वर्ष पहले की गई थी। उस समय सामान्य सी पर्ची का छापना भी एक नई बात थी। मैं एक रोचक घटना का जिक्र करना चाहूंगा। मेरी पार्टी ने मुझे कोटपुतली में प्रचार-प्रसार के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी थी। उस क्षेत्र की समस्याओं का अध्ययन करने के बाद मैंने कुछ साहित्य तैयार किया। यह वर्णन करते हुए कि यदि हमारी पार्टी के प्रत्याशी चुनाव जीत गए तो वे उन समस्याओं का किस तरह से समाधान करेंगे। मैं राजस्थान के लिए पार्टी के घोषणा-पत्र की प्रतियां भी लाया था।

मैं चुनाव से करीब महीने भर पहले क्षेत्र में पहुंच गया था और वहां तब तक रहने का प्रण लिया था जब तक चुनाव समाप्त नहीं हो जाए। जब मैं चुनाव से जुड़ी पुस्तिकाएं जो जयपुर से लाया था, को उतार रहा था तो हमारा प्रत्याशी दूर खड़े होकर मुझे आश्चर्य से देख रहा था। हालांकि, मैं उनसे आधी उम्र का था-लेकिन उन्होंने मुझे आदर से आडवाणी जी सम्बोधित करते हुए पूछा - क्या आप मुझे और मेरे कार्यकर्ताओं से इन पुस्तिकाओं को क्षेत्र में बंटवाना चाहते हैं? लेकिन इसकी जरूरत कहां है? यह घोषणा-पत्र और पुस्तिकाएं हमारी चुनाव रणनीति के लिए पूरी तरह बेकार है। हम लोगों को अपना काफी समय और ऊर्जा, दोनों इन्हें वितरित करने में लगाना होगा। फिर भी, अगर आप कहेंगे तो हम लोग इसे करेंगे। लेकिन इससे हमें एक भी अतिरिक्त वोट की बढ़ोतरी नहीं होगी।

उन्होंने आगे कहा - आडवाणीजी, मैं आपको एक बात बता दूं कि इस चुनाव में मुझे कोई भी नहीं हरा पाएगा। यह गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र है और मैं अकेला गुर्जर इस चुनाव में खड़ा हूं। उसके आगे के वाक्य ने मेरी आंखें खोल दीं और भारत में चुनाव की वास्तविकता सामने ला दी। उन्होंने कहा,”सबसे पहले, हर गुर्जर जो चुनाव बूथ पर वोट डालने जाएगा, वह मुझे ही वोट देगा क्योंकि मैं गुर्जर समुदाय का अकेला प्रत्याशी हूं। दूसरी बात यह है कि अधिकांश गैर-गुर्जर भी मुझे ही वोट देंगे क्योंकि वे जानते हैं कि इस चुनाव क्षेत्र में मेरी जीत की अधिक संभावना है। वे अपने वोट हारने वाले प्रत्याशी को देकर बर्बाद नहीं करेंगे।

वर्षों तक अधिकतर सन् 1980 के दशक के अंत तक, समाचार-पत्र, पत्रिकाएं और आकाशवाणी ही राजनीतिक संवाद तथा प्रचार का अकेला माध्यम हुआ करती थी। तब तक प्रिंट मीडिया सरकारी स्वामित्व में नहीं थे। वे स्वतंत्र थे और समाचारों और विचारों के लिए वे गैर-कांग्रेसी पार्टियों पर निर्भर हुआ करते थे। हालांकि, रेडियो पर पूरी तरह से सरकार का नियंत्रण था और कांग्रेस निर्लज्जतापूर्वक अपने प्रचार (प्रोपेगेंडा) के लिए इसका इस्तेमाल करती थी। मुझे याद है कि किस प्रकार 1982 में आन्ध्रप्रदेश के विधानसभा चुनावों में पूरे अभियान के दौरान ऑल इंडिया रेडियो पर श्री एन.टी.रामाराव का एक बार भी नाम नहीं लिया गया जबकि उन्होंने भारी बहुमत से चुनावों में जीत हासिल की थी। पहली बार आकाशवाणी पर उनके नाम का प्रसारण तब हुआ जब राज्यपाल ने उन्हें शपथ लेने हेतु आमंत्रित किया था।

श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा लगाये गये आपातकाल के समाप्त होने के बाद बनी जनता पार्टी की सरकार (1977-79) में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनने के बाद, मेरे ऊपर न केवल उस आधारभूत संरचना को समाप्त करने की बल्कि उस मनोवृति को भी खत्म करने की मुख्य जिम्मेदारी थी जिसे सत्तासीन पार्टी अपने हित के लिए इस्तेमाल करती थी। मेरा एक निर्णय जिस पर मुझे गर्व है और जिसका काफी स्वागत किया गया था, वह यह है कि 1952 से लेकर अब तक पहली बार विपक्षी पार्टियों को विधानसभा और लोकसभा चुनावों की पूर्व संध्या पर जनता के समक्ष अपने संदेश को प्रसारित करने का समय आबंटित किया गया।

इंटरनेट की कई आकर्षक खूबियां हैं। लेकिन उन सब में सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस पर न तो सरकार का स्वामित्व है और न ही किन्हीं प्राइवेट लोगों का। यह सबके लिए खुला मंच है और अब तक संवाद के लिए खोजे गए माध्यमों में सबसे अधिक लोकतांत्रिक माध्यम है। इंटरनेट पर राजनीतिक संवाद पर सेंसरशीप लगाना असंभव और सोच से परे है - कम्युनिस्ट और तानाशाही व्यवस्था को छोड़कर।

सन् 1952 से भारत में चुनाव हो रहे हैं और तब से हम लोग एक लम्बा समय तय कर चुके हैं। मतदाता अकेले और सामूहिक तौर पर, दोनों तरह से अधिक परिपक्व हो चुका है। वोट की शक्ति के बारे में लोकतांत्रिक जागरूकता और चेतना कई गुना बढ़ चुकी है। अब कोई भी राजनीतिक पार्टी और प्रत्याशी उन्हें अपनी जेब में पड़ा नहीं मान सकते हैं। मतदाता वर्तमान सरकार को उनके कार्य-निष्पादन पर तोलते हैं, वहीं विपक्षी/प्रतिद्वंध्दी पार्टी को उसके स्टैंड और अपनी अपेक्षाओं पर खरे उतरने की क्षमताओं से परखता है। दूसरे शब्दों में, चुनावी प्रचार काफी महत्वपूर्ण होता है। खासकर उन दिनों की अपेक्षा जब मुझे राजस्थान में कोटपुतली से खड़े हमारे उम्मीदवार ने मुझे मुद्रित चुनावी साहित्य का इस्तेमाल करने की मनाही कर दी थी।

पुरानी प्रिटिंग प्रेस जहां जिस टाइप का प्रयोग किया जाता था, में परचे छापने का प्रचलन अब लगभग खत्म हो चुका है। आज मैं इंटरनेट पर ब्लॉग लिख रहा हूं। चुनावी प्रचार के लिए इस टेक्नालॉजी का इस्तेमाल करने का मेरा यह लम्बा सफर रहा है।

मेरे पहले ब्लॉग को पढ़ने में आपने अपना जो बहुमूल्य समय लगाया, उसके लिए धन्यवाद। मैं वादा करता हूं कि मैं शीघ्र ही लौटूंगा। तब तक के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

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14 Responses to “चुनाव अभियान : पर्चे (हैंडबिल) से लेकर इंटरनेट तक”

  1. parikhjigish Says:

    Dear Shri Advaniji,

    I wish to write comment in Hindi but that’s not an option here. I am proud of you as my leader for the fact that you have wrote your blog in national language. Young India wants you for the “top job” and is willing to support you. Reach out to us more on local level. Young India likes BJP because BJP will not let Pakistan get away with lame “paper” reports in response to gruesome killings of innocent Indians. Last thing we want to see is another govt incapable of tackling Islamist extremism. India has become laughing stock in strategic international circles for its incapability to fight terror despite its sheer size,manpower and technology. Please change that image. Deal with Pakistan in a language it understands(how my state’s chief minister Mr. Narendra Modi sugguests) Lastly if you have few more moments, please take a look at my nationalist blog which is an attempt to raise awareness among people about India’s national issues. (http://deshdaaz.blogspot.com).

  2. NAGENDRA SHUKLA Says:

    I THINK YOUR PARTY NOT DOING WELL ADVERTISEMENT IN CITY AREA AND ALSO IN RURAL AREA YOU HAVE THINK ABOUT THIS AT THIS TIME RAHUL GANHI ATTRACT YOUNGE PEOPLE IN HIS PARTY BUT IN YOUR PARTY NO ONE ABLE TO THIS IN MY LANGUAGE WE HAVE GOOD PRODUCT BUT NO ONE ABLE TO SALE THIS OUR STRENGTH IN GRASS ROT LEVEL IS VERY LOW WE HAVE TO THIK ABOUT THAT

  3. angshuman Says:

    Respected Sir

    In respect with mordern Internet Era The step taken by you and your team is a great move . You will get great support at least from youngh generation.

    From
    Angshuman Bharadwaj Rakshit
    New Delhi

  4. BengalVoice Says:

    Dear Advani ji,

    Please make all Indians aware of this Mughalistan threat. A second partition of India must be averted:

    http://www.BengalGenocide.com/Mughalistan.php

  5. harisjoshi Says:

    आडवाणी जी,
    हिंदी में आपका ब्‍लाग देखकर अच्‍छा लगा। हो सकता है कि मैं आपकी विचारधारा के कुछ हिस्‍से से सहमत न होउं। मेरी अज्ञानता भी हो सकती है। लेकिन आपने कई तथ्‍य/बातें बहुत साफगोई से लिखीं हैं। हो सकता है कि ब्‍लाग लिख कोई दूसरा रहा हो लेकिन आपकी सहमति भी मायने रखती है। आपके गुर्जर प्रत्‍याशी वाले प्रसंग ने सारी कहानी खुद बयां कर दी है। हांलाकि आपने अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर का बाकया लिखा है लेकिन दुख है कि आज भी हम वहीं के वहीं खड़े हैं। तकनीक में हम भले ही आगे बढ़ गए हों लेकिन सोच में शायद कुछ इंच ही खिसके हैं। चुनावी सोच में। आज भी सभी राजनीतिक दल जाति और धर्म के समीकरण बिठाकर उम्‍मीदवार का चुनाव करते हैं। योग्‍यता का पैमाना व्‍यक्ति की जाति, जेब और बाहुवल होता है। ऐसे में योग्‍यता आंसू बहाती रहती है।

  6. harisjoshi Says:

    आपके ब्‍लाग पर मैं आरक्षण पर अपने विचार रखने का मोह छोड़ नहीं पा रहा हूं। मैं हर तरह के आरक्षण के खिलाफ हूं क्‍योंकि आरक्षण का लाभ भी सवर्णों को ही मिलता है। जी हां! अवर्णों में भी सवर्णों की एक लंबी जमात है जो इस फायदे की सबसे ज्‍यादा मलाई चट कर जाती है। लेकिन वोटों की खातिर कोई दल खुलकर नहीं बोलता और सत्‍ता में आने पर गूंगी गुडि़या बन जाता है। उम्‍मीद है कि आप आम सभा में कुछ भी बोलें लेकिन इस मंच पर जो भी बोलेंगे/लिखेंगे; वह दलगत राजनीति से अलग होगा।

  7. manoj kumar singh Says:

    hello sir good evening
    i m from small city varanasi in u.p.,here in varanasi B.J.P. is in his decline stage . mr. Murli Manohar Joshi is the candidate from here of ur party but party position is not good in varanasi ,I m not member of any party but having some intrest in RSS value’s and beliefs.
    sir plz do something to improve the party condition in varanasi……

  8. manoj kumar singh Says:

    hello advani sir ,
    U should use the youngester and young leader to increase the faith in B.J.P of youngester because india is holding most no. of young people in the world.

  9. chitresh Says:

    Dear Advani ji
    listen the voice of india
    we want Modi ji is our P M
    declare him the P M candidate
    you will see B J P will win 300+ seats alone
    Modi is Obama of India
    he can do magic of clean sweap

  10. sandeep_rinku Says:

    NAMASKAR SIR JI

    ATAL BIHARI JAISI SOCH WALA NETA AAJ TAK NAHI AAYA. AAP BHI UN JAISE NETA HO.
    AAPKI PARTY BJP JAROOR JITEGI. AAP SAB DHARMO KO SAATH LEKAR CHALEIN.
    MANMOHAN SINGH JAISA KAMJOR LEADER IS DESH MAIN DUBAARA PM NAHI BANEGA.

  11. atulsaxena Says:

    sir,

    namaskar,

    i m 32 yrs old and i used to cry when BJP looses in elections, now i m a man so cBJPant cry but pls take BJP back to center…i want to see you as our PM ..and pls pls make temple in ayodhya after that nobody can remove bjp from power..PROVE jo kaha woh kiya.

    ATUL

  12. MpHimanshu Says:

    Respected Sh. Advani ji,

    Telgi ke gayab paise ke bare me Aap kuch kahenge ?

    Wah vi swiss bank ki tarah, kala dhan tha - INDIA mai.
    kya Aap use dnoodh layenge? PLEASE Garibon ke waste.

    Mrityunjay Pokhariyal “Himanshu”

  13. faizan lari Says:

    Namaskar
    Advani Ji
    mai faizan lari utter pradesh ke salempur nirvacan chetra ka rehne wala hu
    U should use the youngester and young leader to increase the faith in B.J.P of youngester because india is holding most no. of young people in the world.

  14. akshat upadhyay Says:

    BHARAT KI YAHI HA VANI,ABKI BARI L.K.ADVANI

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