नदियों को परस्पर जोड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय का उत्कृष्ट निर्णय
सन् 2011 के अंतिम दिनों में मैंने तीन मुद्दों-भ्रष्टाचार, मंहगाई और कालेधन-को मुखरित करने के उद्देश्य से 40 दिन की रथयात्रा की थी।
इस यात्रा के दौरान राजस्थान में शेखावाटी के रेगिस्तान क्षेत्र से गुजरते हुए, मुझे एक व्यक्ति ने बताया कि जब एनडीए की सरकार थी तब प्रधानमंत्री वाजपेयी ने नदियों को जोड़ने के बारे में बोला था तो राजस्थान के किसानों को इससे बड़ा जोश भर गया।
वास्तव में, जब-जब मैं अपने भाषण में एनडीए की इस परियोजना, जिसके सम्बंध में शिव सेना के नेता सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में टास्क फोर्स गठित की गई थी, का उल्लेख करता था तब उपस्थित जनसमूह से अच्छा-खासा भीड़ से समर्थन मिलता था।
सन् 2002 में सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका कर गंगा, कावेरी, वगई और तामबरावनी जैसी नदियों को जोड़कर जल संरक्षण तथा उपलब्ध स्त्रोतों के समुचित उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एस.एच. कापडिया की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने 27 फरवरी, 2012 को अपने 63 पृष्ठीय फैसले में केन्द्र और राज्य सरकारों को परमादेश (Mandamus) देते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
64. अपनी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए, अन्तत: हम इस जनहित याचिका का निपटान निम्न निर्देशों के साथ करते हैं:
(I) हम भारत की केन्द्र सरकार, विशेष रुप से भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय को निर्देश देते हैं कि वह तुरंत ‘नदियों को परस्पर जोड़ने हेतु विशेष समिति‘ (स्पेशल कमेटी फॉर दि इंटर-लिंकिंग ऑफ रिवर्स‘) (आगे इसे ‘कमेटी‘ के नाम से पुकारा जाएगा) एक कमेटी गठित करे जिसमें निम्नलिखित सदस्य हों:
1- माननीय मंत्री, जल संसाधन मंत्रालय
2- सचिव, जल संसाधन मंत्रालय,
3- सचिव, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय,
4- चेयरमैन, केंद्रीय जल आयोग,
5- सदस्य-सचिव, राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण,
6- निम्न मंत्रालयों/निकायों से चार विशेषज्ञों को मनोनीत किया जाए:
(क) एक विशेषज्ञ जल संसाधन मंत्रालय से,
(ख) एक विशेषज्ञ वित्त मंत्रालय से,
(ग) एक विशेषज्ञ योजना आयोग से,
(घ) एक विशेषज्ञ पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से।
7- प्रत्येक सम्बन्धित राज्यों के जल और/या सिंचाई मंत्री के साथ-साथ उसी राज्य के सम्बन्धित विभाग के प्रधान सचिव।
8- जल सम्बन्धी नदियों को जोड़ने वाली योजना से सीधे या परोक्ष रुप से जुड़े अन्य राज्य के मुख्य सचिव अथवा उनके द्वारा मनोनीत अधिकारी जो प्रधान सचिव से कम दर्जे का न हो और सम्बन्धित विभाग से हो।
9- सम्बन्धित मंत्रालयों द्वारा मनोनीत दो सामाजिक कार्यकर्ता।
10- श्री रंजीत कुमार, ‘न्यायमित्र‘ (Amicus Curiae)
(II) कमेटी कम से कम दो महीने में एक बार मिलेगी और इसके विचार-विमर्श तथा मिनट्स का रिकार्ड रखेगी।
(III) किसी भी व्यक्ति की अनुपस्थिति के चलते, चाहे उसकी हैसियत कुछ भी हो, बैठक स्थगित नहीं की जाएगी। यदि जल संसाधन के माननीय मंत्री उपलब्ध नहीं हैं, तो जल संसाधन मंत्रालय के सचिव बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
(IV) नदियों को जोड़ने के कार्यक्रम के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए यदि कमेटी को आवश्यक लगे तो वह एक उप-समिति भी गठित कर सकती है, जिसकी अवधि और शर्तें उपयुक्त हों।
(V) कमेटी, भारत सरकार की केबिनेट को वर्ष में दो बार रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी जिसमें वर्तमान स्थिति (स्टेट्स) प्रगति रिपोर्ट के साथ-साथ अपेक्षित निर्णय भी लिए जाएंगे जिन मामलों को पहले ही बता दिया गया है। केबिनेट देश के हित में शीघ्रतातिशीघ्र सभी अंतिम और उपयुक्त निर्णय लेगी और अच्छा होगा कि उसके सम्मुख रखे गए मामलों के तीस दिन के भीतर यह निर्णय लिए जाएं।
(VI) विशेषज्ञ समितियों सहित सभी रिपोटें और इस याचिका के न्यायालय में विचाराधीन अवधि में सौंपी गई सभी स्थिति रिपोर्टों को कमेटी के सम्मुख विचारार्थ हेतु रखा जाएगा। रिपोर्टों और विशेषज्ञ अभिमतों के अपेक्षित विश्लेषण पर कमेटी इस योजना के कार्यान्वयन हेतु इसकी योजनाएं तैयार करेगी।
(VII) योजना इस प्रकार तैयार की जाएगी की उसमें योजना के क्रियान्वयन और पूर्ण करने, योजना, क्रियान्वयन, निर्माण, लागू करने से जुड़े विभिन्न चरण होंगे।
(VIII) हमें सूचित किया गया कि ‘केन-बेतवा-योजना‘ की प्रारम्भिक और विस्तृत रिपोर्टों को तैयार करने पर काफी धन व्यय किया गया है। डीपीआर अब तैयार है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तथा केन्द्र सरकार ने भी पहले ही अपनी स्वीकृति और सहमति दे दी है। मांगे गए स्पष्टीकरणों पर कमेटी द्वारा विचार किया जाएगा। हमे कमेटी को निर्देशित करना चाहेंगे कि वह पहले चरण में इस परियोजना को क्रियान्वयन के लिए हाथ में ले।
(IX) विशेषज्ञ रिपोर्टो्रं को ध्यान में रखते हुए, हमें यह मानने और निर्देश देने में कोई संकोच नहीं है कि नदियों को जोड़ने वाली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में समय एक अत्यन्त महत्वपूर्ण कारक है। जैसाकि एनसीएइआर तथा स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि विलम्ब से सम्बन्धित पक्षों और लोगों को होने वाले वित्तीय लाभ बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं और वास्तव में सभी सम्बन्धित पक्षों पर वित्तीय दवाब बनाए हुए हैं।
(X) यह निर्देशित किया जाता है कि कमेटी व्यवहार्यता रिपोर्टों या अन्य रिपोर्टों को पूरा करने के लिए कड़े कदम उठाएगी और एक निश्चित समय सीमा तय करेगी और योजनाओं को पूरा करने को सुनिश्चित करेगी ताकि लाभ सही समय और लागत में मिल सकें।
(XI) प्रारम्भिक चरणों में, इस कार्यक्रम में उन राज्यों को शामिल नहीं किया जाएगा जिनके पास पर्याप्त जल है और नदियों को आपस में जोड़ने के किसी कार्यक्रम से वे ठोस रूप से नहीं जुड़े हैं और योजनाएं उनकी प्रभावी भागीदारी के बिना भी पूरी की जा सकती हैं।
(XII) हालांकि, कमेटी किसी भी राज्य को कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के किसी भी चरण में शामिल कर सकती है।
(XIII) अनेक ऐसी योजनाएं हैं जिन पर पेपर वर्क पिछले दस वर्षों से ज्यादा समय से और जनता के धन की बड़ी कीमत पर चल रहा है इसलिए, हम केन्द्र और राज्य सरकारों को इस कार्यक्रम में भाग लेने का निर्देश देते हैं और सभी वित्तीय, प्रशासनिक तथा इन योजनाओं को और प्रभावी ढंग से पूरा करने हेतु सहायता उपलब्ध कराने का भी।
(XIV) रिकार्ड से यह साफ दिखता है कि टास्क फोर्स द्वारा सौंपी गई रिपोर्टों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अत:, टास्क फोर्स द्वारा किए गए सारे प्रयास, एक प्रकार से सम्बन्धित सरकारों, और जनता के लिए किसी उपयोग के नहीं रह गए हैं। टास्क फोर्स को समाप्त कर दिया गया है। टास्क फोर्स की रिपोर्टें कमेटी के सम्मुख रखी जाएं जो निस्संदेह, इसमें दिए गए सुझावों पर विचार करते हुए निर्णय करेगी कि कैसे इनको जनता के लाभ हेतु क्रियान्वित किया जाए।
(XV) इस निर्णय के तहत गठित कमेटी नदियों को जोड़ने वाले कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की जिम्मेवार होगी। इसके निर्णय, इस न्यायालय या अन्य के आदेश से गठित सभी प्रशासनिक निकायों के ऊपर लागू होंगे।
(XVI) इस निर्णय में वर्णित निर्देशों के कार्यान्वयन न होने या असफल होने की दशा में हम ‘न्याय मित्र‘ (Amicus Curiae) को अवमानना याचिका दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं।
65) यदि हम विद्वान ‘न्याय मित्र‘ (Amicus Curiae) द्वारा दी गई मूल्यवान और योग्य सहायता और अन्य सभी वरिष्ठ वकीलों और उनके सहायकों द्वारा वर्तमान पीआईएल के संदर्भ में पेश होने के सम्बन्ध में रिकार्ड में अपनी प्रशंसा नहीं दर्ज कराते तो हम अपना कर्तव्य पूरा नहीं कर पाएंगे।
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यदि कोई मुझसे पूछे कि वाजपेयीजी की एनडीए सरकार की मुख्य उपलब्धियां क्या थीं, तो मैं इन तीन को रेखांकित करूंगा:
पहली, इसने पाकिस्तान के साथ शांति और सामान्य सम्बन्ध बनाए रखने में अपनी गंभीरता प्रदर्शित की लेकिन साथ ही वाजपेयी सरकार ने पाकिस्तान के पूर्वाग्रही सैन्य इरादों और सीमापर के आतंकवाद के बारे में, अपने जीरो टॉलरेन्स रवैये को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। इसलिए सत्ता में आने के दो महीनों के भीतर एनडीए सरकार ने भारत को परमाणु शक्ति बना दिया।
दूसरी, एनडीए सरकार ने समूचे देश के लिए राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों के नेटवर्क के लिए एक ठोस नींव रखी।
तीसरी] एनडीए सरकार ने मुख्य नदियों को आपस में जोड़ने का न केवल महत्वाकांक्षी कार्यक्रम तैयार किया अपितु इस काम को विशेष रूप से करने के लिए एक वरिष्ठ मंत्री सुरेश प्रभु को भी काम में जुटाया। हाल ही में सुरेश प्रभु मुझे मिले थे और उन्होंने इस हेतु किए गए दुसाध्य कार्य का विस्तृत व्यौरा मुझे बताया। उन्होंने देश के सभी राज्यों में 5 हजार से ज्यादा छोटी और बड़ी मीटिंग कीं। इसके अलावा उन्होंने आईसीआईसीआई के चेयरमैन के.वी. कामत की अध्यक्षता में वित्तिय विशेषज्ञों और प्रमुख बैंकरों की एक कमेटी गठित की जिसने नदियों को आपस में जोड़ने की इस योजना के लिए एक अत्यन्त नवीन और दूरगामी योजना तैयार की।
सुरेश प्रभु ने मुझे बताया कि विशेषज्ञों का यह समूह पूरी तरह आश्वस्त था कि वे नदियों को जोड़ने की योजना के लिए कम से कम 5,60,000 करोड़ रूपये का निवेश जुटाने में सफल होंगे।
एक और तथ्य सुरेश प्रभु ने बताया कि प्रभावी योजना आयोजन ओर निगरानी हेतु डा0 कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में ‘इसरो‘ (ISRO) रिमोट सेंसिंग, जीआईओएस, सेटेलाइट इमेज़नरी का उपयोग करने हेतु समहत हो गए थे।
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सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए इस फैसले को तीन महीने बीत चुके हैं। और न्यायालय जिस स्पेशल कमेटी का गठन चाहता था, वह अभी तक नहीं हुआ है। किसी को आश्चर्य नहीं होगा यदि ‘न्याय मित्र‘ (Amicus Curiae) श्री रंजीत कुमार, जिनको इस केस में अपना योगदान देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने अभिनंदित किया है, न्यायालय की विशेष सलाह को मानते हुए जल संसाधन मंत्रालय के ‘दोष‘ के विरूध्द अवमानना याचिका दायर करें तो!
लालकृष्ण आडवाणी
नई दिल्ली
29 मई, 2012
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