Print This Post Print This Post

सदमें में गुजरात कांग्रेस

No

मुझे स्मरण नहीं आता कि किसी राज्य के स्थानीय निकायों के नतीजे इतनी राजनीतिक हलचल मचा देंगे जितनी कि पिछले सप्ताह गुजरात में देखने को मिली।

 

नगर निगमों और पंचायत चुनावों के नतीजों ने राज्य में कांग्रेस पार्टी को सकते में ला दिया है।

 

गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष सिध्दार्थ पटेल ने इस पराजय की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना त्यागपत्र दे दिया है। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस पार्टी नेता शंकर सिंह गोहिल ने भी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है।

 

गुजरात में 6 नगर निगम हैं। ये हैं-अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, सूरत, जामनगर और भावनगर।

 

इन निगमों में गत् 10 अक्टूबर को मतदान हुआ। इन चुनावों में भाजपा शानदार ढंग से विजयी हुई।

 

21 अक्टूबर को स्थानीय निकायों के चुनावों का दूसरा चरण पूरा हुआ। पहले दौर में पूर्णतया शहरी मतदाता थे जबकि दूसरे दौर में आंशिक रूप से शहरी लेकिन प्रमुखतया ग्रामीण आबादी थी।

 

इस दौर में 53 नगरपालिकाओं में से भाजपा 42 पर विजयी रही और कांग्रेस मात्र 4 पर। सात पर अन्यों की विजयी हुई।

 

24 जिला पंचायतों के चुनावों में से भाजपा 21 पर कांग्रेस 2 पर विजयी रही। एक अनिर्णित है।

 

208 तालुका पंचायतों के नतीजे इस प्रकार हैं: भाजपा 155, कांग्रेस 37 और 6 अनिर्णित।

 

भाजपा इस बार कांग्रेस के भारी भरकम नेताओं केन्द्रीय मंत्री भरत सिंह सोलंकी (आणद) और दिनशा पटेल (खेड़ा) के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण विजय पाने में सफल रही।

 

इन चुनावों की एक शानदार विशेषता यह रही कि 100 से ज्यादा मुस्लिम प्रत्याशी विभिन्न स्तरों पर चुनाव जीते और वह भी भाजपा के टिकट पर।

 

भाजपा के लिए यह दूसरी महत्वपूर्ण उपलब्धि रही कि घनी ईसाई वनवासी आबादी वाले डांग में पार्टी का विजयी होना।

 

मध्य गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। नरेन्द्रभाई मोदी ने सही ही टिप्पणी की है कि मुस्लिम और ईसाइयों का भी कांग्रेस की वोट बैंक राजनीति से मोहभंग हो गया है और उन्होंने भाजपा की विकास की राजनीति को स्वीकार किया है।

 

भाजपा को यह चुनाव जीतने की उम्मीद थी। लेकिन मैं स्वीकार करना चाहूंगा कि नतीजे हमारी सारी अपेक्षाओं से ज्यादा आए।

 

यह नतीजे पराजय मात्र नहीं हैं अपितु गुजरात में कांग्रेस का सफाया है।

 

नई दिल्ली अच्छे ढंग से समझ पाएगा कि ऐसे नतीजे किसी दल के प्रति रूझान मात्र का संकेत नहीं देते अपितु ये किसी दल के विरूध्द मतदाताओं के जोरदार गुस्से की ओर इशारा करते हैं। मैं सदैव ऐसे चौंकाने वाले नतीजों का अनुभव 1977 के उत्तर भारत के लोकसभाई चुनाओं से करता हूं जब जम्मू एवं कश्मीर से पश्चिम बंगाल तक 304 लोकसभाई सीटों में से कांग्रेस मात्र 12 पा सकी थी! पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में पार्टी एक सीट भी नहीं जीत पाई थी।

 

यदि नई दिल्ली समझती है कि यह गुजरात कांग्रेस नेतृत्व की असफलता मात्र है तो यह सरासर गलत होगा।

 

1977 की भांति मतदाता न केवल आपातकाल की ज्यादतियों से क्रोधित था अपितु केंद्र सरकार द्वारा विपक्ष के साथ किए गए बर्ताव से भी बिक्षुब्ध था। (शाह आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 102003 राजनीतिक कार्यकर्ताओं को मीसा या भारत सुरक्षा कानून के तहत बंदी बनाकर जेल में डाल दिया गया था।) इसी प्रकार केंद्र सरकार और केंद्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी, उनकी सरकार और गुजरात में भाजपा के विरुध्द चलाए जा रहे द्वेषपूर्ण वैमनस्य ने गुजरात के मतदाताओं को वास्तव में गुस्से से भर दिया।

 

केंद्र सरकार और कांग्रेसी नेतृत्व को इस बारे में कुछ आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और इन नतीजों को 2012 चुनावों की पूर्व चेतावनी देखनी चाहिए।

 

न्यूयार्क की प्रतिष्ठित प्रत्रिका फॉरब्स (Forbes) ने दुनिया के तेजी से बढ़ते शहरों की लम्बी सूची प्रकाशित की है जिसमें शीर्ष के 15 में भारत के तीन शहरों-अहमदाबाद, चेन्नई और बंगलौर को शामिल किया गया है। यह गुजरात के लिए गर्व का विषय है कि अहमदाबाद सूची में तीसरे स्थान पर है। चेन्नई 10वें और बंगलौर 15वें स्थान पर है! अहमदाबाद से पहले के दो ही शहर हैं और वे हैं चीन के चेंगढू और चंगक्यूइंग।

 

फॉरब्स पत्रिका ने अहमदाबाद के बारे में लिखा है गुजरात में सर्वाधिक बड़ा महानगरीय क्षेत्र, भारतीय राज्यों में से संभवतया सर्वाधिक बाजारोन्नमुखी और व्यापार के अनुकूल।रिपोर्ट यह भी बताती है कि गुजरात की नीतियों ने टाटा नैनो कारखाना पश्चिम बंगाल से गुजरात के एक क्षेत्र साणद लाने में सफलता पाई।इसने एक भारतीय विद्वान सेधा मेनन को उदृत करते हुए लिखा है कि राज्य ने अपने घरेलू प्रतिद्वंदियोंकी तुलना में तेजी से आधारभूत ढांचा विकसित किया-सिंगापुर और मलेशिया के कुछ भागों की तरह।

 

यह फॉरब्स रिपोर्ट कहती है कि अहमदाबाद वीआरटीएस, साबरमती रिवरफ्रंट विकास और कांकरिया लेकफ्रंट जैसे महत्वकांक्षी आधारभूत परियोजनाओं के साथ तेजी से बढ़ रहा है।यह इसलिए भी हो रहा है कि राज्य सरकार और एएमसी तथा एयूडीए जैसी स्थानीय सरकारों द्वारा सकारात्मक विकास करने से अहमदाबाद इस तेज गति से विकास कर रहा है।

 

 

लालकृष्ण आडवाणी

नई दिल्ली

25 अक्टूबर, 2010

If you enjoyed this post, make sure you subscribe to my RSS feed!

Visit my website

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.