गुजरात कैसे ‘जीवन्त’ (वॉयब्रेंट) बना

मकर संक्रांति (14 जनवरी) हमारे देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग नामों से जानी जाती है। तमिलनाडु में यह त्योहार पोंगल के नाम से मनाया जाता है। असम में यह बीहू के नाम से गीत, नृत्य और हर्षोंल्लास के साथ मनाया जाता है। पंजाब और उत्तर भारत के कई भागों में यह त्योहार एक या दो दिन पहले मनाया जाता है। जिसे लोग लोहड़ी कहते हैं। ठंडी रात के समय लोग इकट्ठे होकर लकड़ियों के ढेर बनाकर उसे जलाते हैं, लोहड़ी के गीत गाते हैं, रेवड़ी, मूंगफली, पॉपकॉर्न और तिल की बनी मिठाईयां आपस में बांटते हैं। प्रति वर्ष मेरा परिवार लोहड़ी का त्योहार अपने आवास पर दोस्तों, कार्यालय के सहयोगियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ बड़े आनन्द के साथ मनाता है।

मकर संक्रांति मुझे गुजरात, जहां से मैं संसद में प्रतिनिधित्व करता हूं, के पतंग उत्सव की याद दिलाती है। इस दिन अहमदाबाद और राज्य के दूसरे शहरों और कस्बों के ऊपर गहरे नीले आकाश में एक कैनवास सा बन जाता है क्योंकि लाखों लोग अपने घरों की छतों पर चढ़कर भिन्न-भिन्न रंगों की पतंग उड़ाते हुए पतंग उत्सव का आनन्द उठाते हैं और यह वास्तव में, गुजरात में यह अन्तर्राष्ट्रीय पतंग उत्सव सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बन गया है।

वर्ष 2003 से वॉयब्रेंट (जीवन्त) शब्द गुजरात से जुड़ गया है। दूसरे मायने में इसमें राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की प्रतिष्ठा भी बढ़ाई है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि चालू वर्ष की आर्थिक मंदी में भी दो-दिवसीय वॉयब्रेंट गुजरात वैश्विक निवेशक सम्मेलन (Two-day vibrant gujarat global investors’ summit 2009) जो 13 जनवरी को अहमदाबाद में समाप्त हुआ, ने 12 लाख करोड़ रूपये से अधिक के निवेश आकर्षित किए। राज्य सरकार और भावी निवेशकों के बीच 8,500 से अधिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इनसे 25 लाख से ज्यादा अतिरिक्त रोजगार का सृजन होने की संभावना है। यद्यपि वर्ष 2003, 2005 और 2007 में हुए ”वॉयब्रेंट गुजरात” सम्मेलन के पिछले तीन आयोजनों में कुल मिलाकर 6.34 लाख करोड़ रूपये से अधिक के निवेश के वादे प्राप्त हुए जबकि वर्ष 2009 के अकेले सम्मेलन में 12 लाख करोड़ रूपये के निवेश हेतु समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।

जैसी कि ‘द हिन्दू’ समाचार पत्र में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है :

”देश और विदेश के प्रमुख उद्योगपतियों तथा विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने भी श्री नरेन्द्र मोदी को, ऐसे समय पर जब विश्व अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है, औद्योगिक निवेश आकृष्ट करने में राज्य की उपलब्धि के लिए साधुवाद देते हुए करतल ध्वनि से मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत किया।”

वॉयब्रेंट गुजरात 2009

जब श्री नरेन्द्र मोदी ने दिसम्बर, 2007 में
राज्य विधानसभा चुनावों में जबरदस्त जीत
हासिल करने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री
के रूप में शपथ ली थी, उस समय
श्री लालकृष्ण आडवाणी, भारतीय जनता पार्टी
के अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह और श्री नरेन्द्र मोदी
का एक फाइल फोटोग्राफ।

नरेन्द्र भाई की सफलता का राज क्या है? सीधा सा उत्तर है : उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की प्रतिबध्दता सुशासन, विकास और सुरक्षा का अनुकरण किया है।

गुजरात ने देश में न केवल सबसे तीव्र आर्थिक विकास किया है बल्कि इसने सामाजिक विकास में भी जबरदस्त सफलताएं हासिल की हैं। राज्य के कई हिस्सों में पेयजल की भारी और चिरस्थायी समस्या को बड़े पैमाने पर हल कर लिया है। ‘ज्योतिग्राम योजना’ जिसको व्यापक सराहना मिली है, ने राज्य के सभी गांवों और बस्तियों में 24 घण्टे और सातों दिन बिजली मुहैया करने में सफलता प्राप्त की है। आदिवासी क्षेत्रों सहित बीच में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर में कमी आई है। गुजरात स्लम सुधार और शहरी नवीकरण में आगे है।

जिस बात से मुझे विशेष संतुष्टि होती है वह यह है कि गुजरात ने जिस ढंग से राजनीतिक और अफसरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार को कम करने में सफलता हासिल की है, वह अन्य सरकारों के लिए वास्तव में एक आदर्श है। दिसम्बर 2007 में गुजरात विधानसभा चुनावों में नया जनादेश हासिल करने में भारतीय जनता पार्टी की सफलता के बाद मैंने निम्नलिखित टिप्पणी की थी :

”कांग्रेस और इसके छदम्-धर्मनिरपेक्षता के समर्थक इन चुनावों को एक तरह से साम्प्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता के आधार पर राष्ट्रीय जनमत संग्रह में परिवर्तित करना चाहते थे। कहने की जरूरत नहीं है कि वे अपने इरादों में बुरी तरह से विफल रहे।”

मैं एक अन्य कारण से गुजरात चुनावों के परिणाम को महत्वपूर्ण मानता हूं। इससे पता चलता है कि किस तरह से एक निष्ठावान, साहसी एवं समर्थ नेता जनता के समर्थन से दुष्प्रचार के अभियान को पराभूत कर सकता है। मैंने पिछले 60 वर्षों के दौरान भारतीय राजनीति में ऐसा कोई नेता नहीं देखा, जिसे राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर निरन्तर इतने घृणित तथा अनैतिक रूप से बदनाम किया गया हो, जितना श्री मोदी को सन् 2002 से। श्रीमती सोनिया गांधी ने तो सारी मर्यादा तोड़कर उन्हें ”मौत का सौदागर” तक कह दिया। मुझे प्रसन्नता है कि गुजरात के लोगों ने ऐसी विषैली राजनीति करने वालों को सटीक उत्तर दिया।

मुझे यह देखकर हंसी आती है कि इन दिनों भारतीय जनता पार्टी का विरोध करने वाले मीडिया के कुछ वर्ग ‘वॉयब्रेंट गुजरात’ सम्मेलन में भी भारतीय जनता पार्टी में कथित मतभेदों के प्रमाण ढूंढने में कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

मैं केवल उस बात की याद दिला सकता हूं जो मैंने गुजरात विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मिली जबरदस्त विजय के कुछ समय बाद नई दिल्ली में प्रेस सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कही थी।

एक महिला पत्रकार ने मुझसे प्रश्न किया, ”क्या आप नहीं सोचते कि नरेन्द्र भाई का अब पार्टी से भी ऊंचा कद हो गया है? उनके प्रश्न का मैंने यह उत्तर दिया था, ”यह अक्सर परिवार में होता है कि घर का एक छोटा सदस्य ऐसी कोई उपलब्धि हासिल करता है जो पहले किसी ने हासिल नहीं की हो तो उस पर पूरे परिवार को गर्व होता है। परिवार कभी भी उस बारे में अपने आपको कम महत्व वाला नहीं समझता।”

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