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	<title>Comments on: धारा 370 समाप्त करो</title>
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	<pubDate>Thu, 17 May 2012 07:18:27 +0000</pubDate>
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		<title>By: सुनील दत्त</title>
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		<dc:creator>सुनील दत्त</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Mar 2010 16:27:21 +0000</pubDate>
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		<description>हम तो चाहते है कि, शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें। 
हम तो चाहते है कि, शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें।
पर क्या करें, कमबख्त शत्रु मानता ही नहीं, 
पर क्या करें, कमबख्त शत्रु मानता ही नहीं 
शांति की भाषा जानता ही नहीं।।
हमने तो पांडवो की तरह, अफगानीस्थान,पाकिस्तान, बंगलादेश,कशमीरघाटी सब छोड़ दिए थे।
पर शत्रु है, कि रूकने का नाम लेता ही नहीं;  हमले पर हमला किए जाता है।
कभी दंगा भड़काता है तो, कभी आरडीएकस व बम्ब चलाता है।
भारतीयों को हर जगह से मार भगाता है।। 
इस शत्रु ने के, न जाने कितने भारतीयों के घर तोड़े 
हम तो चाहते है कि, शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें। 
आओ; अपने बचे पांच गांवों(भारत) के लिए, शांति छोड़ कर शस्त्र उठायें,
इस कमबख्त, कमीने शातिर शत्रु को मार भगायें।
हम भी इस पर घर वापसी का, दबाब वनायें,
न माने तो इस पर बम्ब चलायें ।
हम शांति तो तब करेंगें, जब हम रहेंगे जब हम ही न रहेंगे ,
तो शमशानघाट की शांति का, भला हम क्या  करेंगे।।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हम तो चाहते है कि, शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें।<br />
हम तो चाहते है कि, शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें।<br />
पर क्या करें, कमबख्त शत्रु मानता ही नहीं,<br />
पर क्या करें, कमबख्त शत्रु मानता ही नहीं<br />
शांति की भाषा जानता ही नहीं।।<br />
हमने तो पांडवो की तरह, अफगानीस्थान,पाकिस्तान, बंगलादेश,कशमीरघाटी सब छोड़ दिए थे।<br />
पर शत्रु है, कि रूकने का नाम लेता ही नहीं;  हमले पर हमला किए जाता है।<br />
कभी दंगा भड़काता है तो, कभी आरडीएकस व बम्ब चलाता है।<br />
भारतीयों को हर जगह से मार भगाता है।।<br />
इस शत्रु ने के, न जाने कितने भारतीयों के घर तोड़े<br />
हम तो चाहते है कि, शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें।<br />
आओ; अपने बचे पांच गांवों(भारत) के लिए, शांति छोड़ कर शस्त्र उठायें,<br />
इस कमबख्त, कमीने शातिर शत्रु को मार भगायें।<br />
हम भी इस पर घर वापसी का, दबाब वनायें,<br />
न माने तो इस पर बम्ब चलायें ।<br />
हम शांति तो तब करेंगें, जब हम रहेंगे जब हम ही न रहेंगे ,<br />
तो शमशानघाट की शांति का, भला हम क्या  करेंगे।।</p>
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		<title>By: मुकुल गोयल एडवोकेट, मथुरा</title>
		<link>http://blog.lkadvani.in/blog-in-hindi/%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-370-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8b/comment-page-1#comment-1924</link>
		<dc:creator>मुकुल गोयल एडवोकेट, मथुरा</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Mar 2010 05:26:01 +0000</pubDate>
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		<description>आदरणीय आडवाणी जी,

आप और आपकी पार्टी के लोग 'भारत के संविधान' में से धारा ३७० को समाप्त करने की बात करते हैं । लेकिन आप इस धारा ३७० को समाप्त कैसे कर पायेंगे क्योंकि-- पिछले साठ सालों में आपको और आपकी पार्टी के लोगों को यही नहीं पता चला है कि-- संविधान में 'धारा' शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है बल्कि 'अनुच्छेद' शब्द का प्रयोग किया गया है । मतलब यह है कि-- यह 'धारा ३७०' नहीं है, बल्कि "अनुच्छेद ३७०" है । जब आपको इतनी सामान्य-सी बात ही नहीं मालूम है तो आप इस 'अनुच्छेद ३७०' को समाप्त करने की प्रक्रिया के विषय में ही क्या जानते होंगे ?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आदरणीय आडवाणी जी,</p>
<p>आप और आपकी पार्टी के लोग &#8216;भारत के संविधान&#8217; में से धारा ३७० को समाप्त करने की बात करते हैं । लेकिन आप इस धारा ३७० को समाप्त कैसे कर पायेंगे क्योंकि&#8211; पिछले साठ सालों में आपको और आपकी पार्टी के लोगों को यही नहीं पता चला है कि&#8211; संविधान में &#8216;धारा&#8217; शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है बल्कि &#8216;अनुच्छेद&#8217; शब्द का प्रयोग किया गया है । मतलब यह है कि&#8211; यह &#8216;धारा ३७०&#8217; नहीं है, बल्कि &#8220;अनुच्छेद ३७०&#8221; है । जब आपको इतनी सामान्य-सी बात ही नहीं मालूम है तो आप इस &#8216;अनुच्छेद ३७०&#8217; को समाप्त करने की प्रक्रिया के विषय में ही क्या जानते होंगे ?</p>
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		<title>By: ePandit</title>
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		<dc:creator>ePandit</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Mar 2010 05:10:12 +0000</pubDate>
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		<description>देश श्री मुखर्जी का हमेशा ऋणी रहेगा। भारत माँ के ऐसे सच्चे सपूत को हमारी तरफ से श्रद्धांजलि।

&lt;blockquote&gt;3 जून, 1953 की रात्रि को पूरा देश यह जानकर स्तब्ध रह गया कि हिरासत के दौरान ही डा. मुकर्जी की तबियत बिगड़ी और कुछ दिन शैय्या पर रहने के बाद अचानक उनका निधन हो गया, और उनका मृत शरीर कलकत्ता भेजा जा रहा है!&lt;/blockquote&gt;
लाल बहादुर शास्त्री, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस आदि जो भी "गैर काँग्रेसी" देशभक्त नेता थे उन सबका अचानक रहस्यमय रुप से ही क्यों निधन हुआ। खेद है कि इस रहस्य से कभी पर्दा न उठेगा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>देश श्री मुखर्जी का हमेशा ऋणी रहेगा। भारत माँ के ऐसे सच्चे सपूत को हमारी तरफ से श्रद्धांजलि।</p>
<blockquote><p>3 जून, 1953 की रात्रि को पूरा देश यह जानकर स्तब्ध रह गया कि हिरासत के दौरान ही डा. मुकर्जी की तबियत बिगड़ी और कुछ दिन शैय्या पर रहने के बाद अचानक उनका निधन हो गया, और उनका मृत शरीर कलकत्ता भेजा जा रहा है!</p></blockquote>
<p>लाल बहादुर शास्त्री, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस आदि जो भी &#8220;गैर काँग्रेसी&#8221; देशभक्त नेता थे उन सबका अचानक रहस्यमय रुप से ही क्यों निधन हुआ। खेद है कि इस रहस्य से कभी पर्दा न उठेगा।</p>
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	<item>
		<title>By: dhiru singh</title>
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		<dc:creator>dhiru singh</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Mar 2010 17:07:27 +0000</pubDate>
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		<description>धारा ३७० ,कामन सिविल कोड, राम जन्म भुमि जॆसे मुद्दे अब बेमानी लगते है आप लोगो के द्वारा. छ साल मे आपके द्वारा कोल्ड स्टोर मे पटके यह मुद्दे इतने ठंडे हो गये है अब कभी गरम ना हो पायेन्गे .</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>धारा ३७० ,कामन सिविल कोड, राम जन्म भुमि जॆसे मुद्दे अब बेमानी लगते है आप लोगो के द्वारा. छ साल मे आपके द्वारा कोल्ड स्टोर मे पटके यह मुद्दे इतने ठंडे हो गये है अब कभी गरम ना हो पायेन्गे .</p>
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