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मेरा निवास, और होली

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सन् 1970 में मैं पहली बार संसद हेतु चुना गया। मैं तब से लेकर-सिर्फ दो वर्ष (1996-98) छोड़कर संसद में हूं। सन् 1996 का चुनाव मैंने इसलिए नहीं लड़ा था चूंकि मैंने घोषणा की थी कि जब तक मैं हवाला के झूठे आरोपों से मैं पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता तब तक मैं संसद में नहीं जाऊंगा।

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सन् 1970 में एक सांसद के रूप में मुझे पण्डारा पार्क में एक फ्लैट आवंटित किया गया। मैं इस फ्लैट में सन् 2002 तक रहा परन्तु गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री बनने पर मेरे सुरक्षा स्टाफ ने मुझे 30, पृथ्वीराज रोड आने को तैयार किया जहां पिछले 10 वर्षों से मैं रह रहा हूं।

 

मुझे याद आता है कि 1970 के शुरूआती दशक में हिन्दुस्तान टाइम्स, नई दिल्ली के मैगजीन सेक्शन में होली पर अनेक लेख प्रकाशित हुए थे। उनमें से एक लेख का शीर्षक था कि दिल्ली में होली के दिन आपको इन स्थानों पर जाने से नहीं चूकना चाहिए। उस लेख में एक पता दिया गया था सी-1/6, पण्डारा पार्क।

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सन् 1977 में आपातकाल के बाद, जब मैं श्री मोरारजीभाई की सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बना तो मेरे सुरक्षा स्टाफ तुझे ने एक बड़े बंगले में स्थानांतरित होने का आग्रह किया। मैंने मना कर दिया और उसी फ्लैट में रहने पर जोर दिया। हालांकि आवास पर कार्यालय का स्थान उपलब्ध कराने के हिसाब से साथ का फ्लैट भी मुझे आवंटित कर दिया गया। इससे मेरे घर में ज्यादा जगह हो गई। लेकिन तब भी सुरक्षाकर्मियों को लगता था कि सुरक्षा की दृष्टि से कम्पाउंड बड़ा होना चाहिए।

 

इस वर्ष कल 8 मार्च को होली थी और मुझे अत्यन्त प्रसन्नता महसूस हुई कि मेरे निवास पर इन चालीस वर्षों से आनन्ददायक और प्रफुल्लित होली आयोजन तनिक भी उत्साह की कमी के बगैर आज ली चल रहा है। वास्तव में, इस होली पर आने वाले अतिथियों की संख्या हजारों में थी। आज की संख्या संभवतया अभी तक की सबसे ज्यादा रही।

 

सुबह से ही अमिताभ का लोकप्रिय रंग बरसेजैसे होली के गीत बज रहे थे और रूक-रूक कर सुबह दस बजे से गायकों की टोलियां लॉन में मौजूद श्रोताओं का हिन्दी और भोजपुरी संगीत गायन से मनोरंजन कर रही थीं।

 

प्रतिभा ने सभी मेहमानों के लिए मिठाइयां (विशेष रूप से गुजिया) और अल्पाहार की व्यवस्था की थी।

देश विभाजन के बाद का एक दशक मैंने राजस्थान में बिताया। मैं कुछ वर्षों के लिए भरतपुर में था जोकि ब्रज का हिस्सा है। और ब्रज अपने जीवंत होली आयोजनों के लिए प्रसिध्द है।

 

मुझे उन दिनों युवाओं द्वारा खेले जाने वाले मजाकिया खेल का मुझे स्मरण आता है। इसमें एक विद्यार्थी छत पर खड़ा हो जाता था और दूसरा गली में। छत पर खड़ा लड़का सुतली बिजली के तारों के ऊपर फेंकता था और गली में खड़ा उसका साथी दूसरे छोर पर उसे किसी हुक के साथ बांध दिया करता था। और यह हुक वहां से गुजरने वाले की पगड़ी में चुपचाप अटका दिया जाता और दुकानदार तथा गली में मौजूद अन्य लोग इस दृश्य का आन्नद लेते कि पगड़ी हवा में उड़ रही है और वह व्यक्ति उसे वापस लाने के लिए प्रयास कर रहा होता।

 

(पश्यलेख) टेलपीस

rajeevमैं अक्सर टिप्पणी करता हूं कि एक लोकतंत्र में प्रधानमंत्री से ज्यादा कोई अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। सिर्फ एक कम्युनिस्ट देश में पार्टी पदाधिकारी ही सरकारी अधिकारी से ऊंचा होता है। लेकिन आजकल भारत में सर्वाधिक महत्वपूर्ण पता 10, जनपथ है न कि 7, रेसकोर्स रोड। इन दिनों मैं अक्सर सोचता हूं कि यदि 1991 में मैंने राजीवजी का प्रस्ताव मान लिया होता तो आज मेरा निवास सर्वाधिक महत्वपूर्ण पता बन गया होता। जब 1989 में जनता दल के विश्वनाथ प्रताप सिंह भाजपा और वाम मोर्चे के बाहरी समर्थन से प्रधानमंत्री बने, तब श्री राजीव गांधी मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेता के रूप में लोक सभा में विपक्ष के नेता नामित हुए।

 

लेकिन 1991 में जब भाजपा ने विश्वनाथ प्रताप सिंह से समर्थन वापस ले लिया तो उनका बहुमत अल्पमत में बदल गया। तब कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पद के लिए श्री चन्द्रशेखर को समर्थन देने का निर्णय किया। पार्टी अध्यक्ष के नाते श्री राजीव गांधी ने इसकी सूचना राष्ट्रपति को दी।

 

इसका तात्कालिक परिणाम यह हुआ कि लोक सभा के स्पीकर ने श्री राजीव गांधी को बुलाकर बताया कि चूंकि उन्होंने प्रधानमंत्री को समर्थन देने का पत्र राष्ट्रपति को भेजा है, अत: उनकी पार्टी अब विपक्षी पार्टी के रूप में नहीं मानी जाएगी, और इसलिए वे विपक्ष के नेता भी नहीं बने रह सकते।

 

उन्होंने भाजपा के नेता के नाते मुझे भी बताया कि अब भाजपा मुख्य विपक्षी दल बन गया है, और इसलिए अब आप विपक्ष के नेता होंगे।

 

मुझे याद आता है कि अगली सुबह मुझे राजीवजी का फोन आया, पहले तो उन्होंने विपक्ष का नेता बनने पर मेरा अभिनन्दन किया और दूसरे, उन्होंने सुझााया कि मुझे अपना पण्डरा पार्क वाला आवास छोड़कर 10, जनपथ में आ जाना चाहिए। उन्होंने कहा जैसे 7, रेसकोर्स रोड प्रधानमंत्री का स्थायी निवास है, वैसे ही 10, जनपथ को विपक्ष के नेता का स्थायी निवास बना दिया जाए।

 

मैंने इस प्रस्ताव के लिए उनको धन्यवाद दिया लेकिन इसे स्वीकारने से भी इंकार कर दिया।

 

 

लालकृष्ण आडवाणी

नई दिल्ली

9 मार्च, 2012

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