लोकतंत्र के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी)

मैं वर्तमान चुनाव अभियान के दौरान अपने अधिकांश भाषणों में भारतीय जनता पार्टी के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) दृष्टिकोण का उल्लेख करता रहा हूं और लोगों को यह बताने की कोशिश करता हूं कि विज्ञान के क्षेत्र में किस तरह से मनुष्य की विद्वता के सबसे नये उपहार ने हमारे देश को सामाजिक-आर्थिक विकास के क्षेत्र में खड़ी अनेक कठिन चुनौतियों पर काबू पाने के लिए एक अद्वितीय अवसर प्रदान किया है।
भारतीय जनता पार्टी के सूचना प्रौद्योगिकी दृष्टिकोण (आईटी विजन) जैसा हमने लोगों से वादा किया है, से भारत को (क) वर्तमान आर्थिक संकट से निपटने; (ख) बड़े पैमाने पर लाभप्रद रोजगार सृजित करने; (ग) व्यापक रूप में उन्नत और विस्तृत शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के जरिए मानव विकास में तेजी लाने; (घ) भ्रष्टाचार को रोकने; और (ड) भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।
इस सप्ताह जब मैंने भारत के प्रमुख आईटी केन्द्र, बंगलौर में एक विशाल बैठक को सम्बोधित किया, तो मैंने उल्लेख किया था कि विज्ञान के इतिहास में सदियों से लेकर अब तक का सबसे बड़ा आविष्कार शायद पहिया रहा है। हमने पिछले दो दशकों में जो कुछ देखा है और अनुभव कर रहे हैं, उसके आधार पर यह मानना पड़ेगा कि ”कम्प्यूटर चिप” ने पहिए का स्थान ले लिया है।
मैंने हाल ही में एक बहुत ही रोचक पुस्तक पढ़ी जिसका शीर्षक है - 1000 वर्ष 1000 लोग। यह पुस्तक कोई पिछली सहस्त्राब्दि के हजार शीर्ष लोगों के नामों का कोई संकलन मात्र नहीं है; बल्कि इसमें वास्तव में उन पुरूषों और महिलाओं की सावधानीपूर्वक रैंकिग की गई है जिन्होंने सहस्त्राब्दि के विकास में योगदान दिया है।
इन एक हजार लोगों की क्रम-स्थापना के लिए पांच मुख्य मापदंड अपनाए गए हैं : दीर्घकालिक प्रभाव; विद्वता और ज्ञान के क्षेत्र में योगदान; समकालीन लोगों पर प्रभाव; योगदान की विशिष्टता और चमत्कार।
इस सूची में पहला नाम जोहन्स गुटेनबर्ग का है जिन्होंने 1430 के दशक में प्रिटिंग प्रेस की खोज की थी। इन एक हजार लोगों में 13 भारतीय लोगों के नाम शामिल हैं। इन भारतीयों में पहला नाम महात्मा गांधी का है। उनका नाम 12वें स्थान पर है।
मैं इस ब्लॉग के सन्दर्भ में विशिष्ट रूप से उन प्रारंभिक टिप्पणियों को मानता हूं जो कम्प्यूटर के प्रादुर्भाव से जुड़े अध्याय पर लेखकों ने की है। प्रस्तावना में कहा गया है :
”पिछली पीढ़ियां टेलीफोन, ऑटोमोबाइल, प्लास्टिक, परमाणु-शक्ति, टेलीविजन, अंतरिक्ष यात्रा के आविष्कार में लगी रहीं। उन सभी में उस टेक्नालॉजी जिससे हमारी जिन्दगी में बदलाव आए, पर भारी विषयांतर रहे। लेकिन किसी ने भी नई सहस्त्राब्दि में उस टेक्नालॉजी का इस्तेमाल नहीं किया जिसका उपयोग हम साहसपूर्वक कर रहे हैं। कम्प्यूटर सबसे भिन्न है। वह किसी भी अन्य आविष्कार से अधिक महत्वपूर्ण है। इसका क्षेत्र ऑटोमोबाइल से भी बड़ा है। इसका हमारी सभ्यता पर अंततोगत्वा प्रभाव काफी दूरगामी है, संभवत: प्रिटिंग प्रेस से भी अधिक।
”यदि हम कम्प्यूटर के अविष्कारकर्ता, इन्टरनेट युग के महान संवाहक के रूप में किसी व्यक्ति के नाम का जिक्र करें तो हमें इसका श्रेय उन नामों में से गुटेनबर्ग को ही देना पड़ेगा।”
कम्प्यूटर उस रैंकिग में प्रिटिंग प्रेस का स्थान क्यों नहीं ले सका, इसका कारण है कि सूची में लगभग 5 लोगों को शीर्ष स्थान पर रखना पड़ेगा। लेखकों ने यह भी कहा है ”इसीलिए हम ट्रांजिस्टर के सूत्रधार जोहन बारडीन; चिप चैम्पियन रोबर्ट नॉयस; पर्सनल कम्प्यूटर (पी.सी.) अग्रणी स्टीफन वॉजनिक; कम्प्यूटर सुपरमैन सेममोर क्राई; और कम्प्यूटर सुपरसेल्समैन डेविड पैकर्ड को सलाम करते हैं।”
भारत की स्वतंत्रता-प्राप्ति के आस-पास अनेक युवाओं में माक्र्सवाद के प्रति बहुत आकर्षण था। इसी अवधि के दौरान ही मुझे पुस्तकों के प्रति अपने लगाव के कारण जॉर्ज ओरवैल द्वारा लिखित दो शानदार पुस्तकों-एनीमल फार्म और 1984 - को पढ़ने का मौका मिला। दोनों ही पुस्तकों में माक्र्सवादी राज्य की विनाशकारी अवधारणा की भर्त्सना की गई है। एनीमल फार्म में बोलशेविक किस्म के सुअरों के एक झुंड ने फार्म पर कब्जा कर लिया था। कहानी काफी उत्तेजित करने वाली है। यही ओरवेलियन की कहानी है जिसका प्रसिध्द सूत्र है : ”सभी पशु समान हैं लेकिन कुछ पशु दूसरों से अधिक समान हैं।” दूसरी पुस्तक ‘1984′ सभी के ज्ञात बिग ब्रदर द्वारा नियंत्रित सर्वसत्ताधारी राज्य के बारे में है। इस निरंकुश राज्य की सफलता का केन्द्र सूचना प्रौद्योगिकी था जिसे अब हम सभी जानते हैं। ओरवैल ने टेलीस्क्रीन नामक एक यंत्र की परिकल्पना की थी जो दीवार के आकार वाला एक सीधा पैनल डिसप्ले था जो राज्य के प्रत्येक घर की तस्वीरें लेकर उसे साथ-साथ बिग-ब्रदर को भेज सकता था।
यह परिकल्पना वैज्ञानिक तौर से साकार हो गई है। पर्सनल कम्प्यूटर (पी.सी.) ने टेलीस्क्रीन को सच बना दिया। लेकिन उसके परिणाम वास्तविकता के बिल्कुल विपरीत थे जिसका ओरवैल को डर था। बिग ब्रदर द्वारा राज्य में प्रत्येक नागरिक की गतिविधियों को देखे जाने की बजाए, अब वही नागरिक कम्प्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से अपने शासकों को पहले की अपेक्षा कहीं अधिक नजदीक से देख सकता है।
इसमें कोई सन्देह नहीं है कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) निरन्तर लोकतंत्र के लिए एक सशक्त हथियार बनता जा रहा है जैसाकि यह चुनाव अभियान के लिए पहले ही एक माध्यम बन चुका है।”
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May 11th, 2009 at 7:05 pm
आडवाणी जी आप का कहना सही हैं की हम आई. टी. में बहुत आगे हैं पर फिर भी हमारे सारे प्रॉजेक्ट्स दूसरे देशो से आते हैं हम लोग उन पर निर्भर करते हैं| हमें हमारे घर में आई. टी. के अवसर पैदा करने चाहिए | और साथ ही साथ कंप्यूटर संबंधित उपकरणों के उत्पादन मैं भी भारत को आगे आना चाहिए | तभी हम चीन को हरा सकते हैं क्योंकि मैं चीन को भारत का सबसा बड़ा दुश्मन समझता हूँ नकी पाकिस्तान को |
और आपसे अनुरोध हैं की इस ब्लॉग को कृपया चुनावों के बाद भी चलाए रखिएगा जिससे जनता को अपने प्रधानमंत्री तक पहुँचने का सुअवसर मिल सके |
धन्यवाद.
नितिन गौड़
February 16th, 2010 at 2:41 pm
ADVANI JI, JAI HIND !
May 6th, 2010 at 10:23 am
I apreciate that your vision toward IT is very clear but today rality is that IT qualified condidates suffers a lot but government is doing nothing. Why?