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	<title>Comments on: सही सेक्यूलरिज्म को समझना</title>
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	<pubDate>Fri, 30 Jul 2010 08:53:38 +0000</pubDate>
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		<title>By: jonathan lal</title>
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		<dc:creator>jonathan lal</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Mar 2009 06:25:13 +0000</pubDate>
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		<description>तीन पेज का छोटा सा उत्तर
कुलदीप को भेजे गए जवाब के आखिरी पैराग्राफ में अटलजी लिखते हैं कि आपके लंबे पत्र का छोटा सा उत्तर भेज रहा हूं। उनके द्वारा लिखे गए इस वाक्यांश से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुलदीप ने कितना लंबा पत्र उन्हें लिखा था, जिसमें वे तमाम बातें थीं जिनकी बदौलत भाजपा की 1985 के चुनाव में ऐसी दुर्दशा हुई थी।

 
नईदुनिया के इस पत्रकार ने मांगी राष्ट्रपति से सपरिवार इच्छामृत्यु की इजाजत
इंदौर से प्रकाशित मध्यप्रदेश के भाषाई समाचार पत्र नईदुनिया के अभय छजलानी और प्रधान संपादक आलोक मेहता को इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री से सम्मानित किए जाने के परिप्रेक्ष्य में यह जान लेना कम दिलचस्प नहीं होगा कि संस्था में कर्मचारियों का कॅरियर किस प्रकार तक चैपट कर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। संस्था ने एक कर्मचारी को इतना परेशान किया कि उसने मजबूर होकर राष्ट्रपति से सपरिवार इच्छामृत्यु की इजाजत मांगी।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>तीन पेज का छोटा सा उत्तर<br />
कुलदीप को भेजे गए जवाब के आखिरी पैराग्राफ में अटलजी लिखते हैं कि आपके लंबे पत्र का छोटा सा उत्तर भेज रहा हूं। उनके द्वारा लिखे गए इस वाक्यांश से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुलदीप ने कितना लंबा पत्र उन्हें लिखा था, जिसमें वे तमाम बातें थीं जिनकी बदौलत भाजपा की 1985 के चुनाव में ऐसी दुर्दशा हुई थी।</p>
<p>नईदुनिया के इस पत्रकार ने मांगी राष्ट्रपति से सपरिवार इच्छामृत्यु की इजाजत<br />
इंदौर से प्रकाशित मध्यप्रदेश के भाषाई समाचार पत्र नईदुनिया के अभय छजलानी और प्रधान संपादक आलोक मेहता को इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री से सम्मानित किए जाने के परिप्रेक्ष्य में यह जान लेना कम दिलचस्प नहीं होगा कि संस्था में कर्मचारियों का कॅरियर किस प्रकार तक चैपट कर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। संस्था ने एक कर्मचारी को इतना परेशान किया कि उसने मजबूर होकर राष्ट्रपति से सपरिवार इच्छामृत्यु की इजाजत मांगी।</p>
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