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राजमोहन कहते हैं, शायद महात्मा सही नहीं थे

March 12, 2014
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ब्लॉगों का मेरा दूसरा संग्रह ‘माई टेक‘ शीर्षक से दिसम्बर, 2013 में लोकार्पित हुआ था, जिसमें काफी ब्लॉग सरदार पटेल, उनके द्वारा देसी रियासतों के उल्लेखनीय विलीनीकरण कार्य, और हैदराबाद के निजाम द्वारा भारतीय संघ में शामिल न होने के समझौते पर हस्ताक्षर न करने पर उनके द्वारा अपनाए गए तरीके जिससे निजाम को मुंह की खानी पड़ी, जैसे विषयों पर केंद्रित थे।   अधिकांश लोगों को शायद पता नहीं कि प्रधानमंत्री पंडित नेहरु निजाम के विरुध्द सैन्य कार्रवाई करने के पक्ष में कतई नहीं थे; और जम्मू एवं कश्मीर की तरह वह हैदराबाद के मुद्दे को भी संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद को सौंपना चाहते थे!   यदि कोई भी उन प्रारम्भिक वर्षों के इतिहास का विश्लेषण करेगा तो निश्चित ही यह महसूस करेगा कि गांधी ने पण्डित नेहरु के बजाय यदि सरदार पटेल को स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रुप में चुना होता तो उन प्रारम्भिक … Continue reading राजमोहन कहते हैं, शायद महात्मा सही नहीं थे

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लगभग पचास वर्ष पूर्व पढ़ी एक अद्वितीय पुस्तक

March 4, 2014
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प्रत्येक वर्ष मेरी सुपुत्री प्रतिभा अपने माता-पिता की वैवाहिक वर्षगांठ (जोकि फरवरी में आती है) किसी न किसी प्रकार के अनोखे ढंग से मनाती है।   इस महीने की शुरुआत में वह मेरे पास आकर बोली

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डा. मनमोहन-सोनिया के नेतृत्व में संसद की गरिमा रसातल में पहुंची

February 17, 2014
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सन् 2004 से अब तक यानी 2014 तक के दस वर्षों में यू.पी.ए. सत्ता में है। यू.पी.ए.-I सन् 2004 से 2009 और यू.पी.ए.-II  सन् 2009 से 2014।

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