Archive for October, 2012

BANGALORE HONOURS A LITERARY GIANT

October 3, 2012
No

Born at Karachi (Sind) in 1927, I spent the first twenty years of my life under British Rule.  Many may be surprised to know that I learnt to read and write Hindi only after 1947, when India became independent, and simultaneously suffered the trauma of partition.     Until that year, the only two languages I was familiar with were Sindhi, my mother tongue, and English, the medium in which I had had my education.   I had first read my Ramayana and Mahabharat in Sindhi, and later on the English versions written by Shri C. Rajagopalachari, and still later, the unabridged versions in English published by the Gita Press, Gorakhpur. After partition I first moved from Karachi to Rajasthan. It was here that I learnt to read and write Devanagri. Two authors whose Hindi books I read a lot while I was in my early twenties were Dr. K.M. Munshi … Continue reading BANGALORE HONOURS A LITERARY GIANT

AddThis Social Bookmark Button

एक साहित्यिक विभूति को सम्मानित किया बंगलौर ने

October 3, 2012
No

सन् 1927 में कराची (सिंध) में जन्म लेने के कारण जीवन के आरम्भिक बीस वर्ष ब्रिटिश शासन में गुजरे। अनेकों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि मैंने हिन्दी पढ़ना और लिखना 1947 में तब सीखा जब भारत स्वतंत्र हुआ और साथ-साथ विभाजन की त्रासदी झेलनी पड़ी।    उस वर्ष तक मैं सिर्फ दो भाषाओं को जानता था – मेरी मातृभाषा सिंधी और अंग्रेजी, जिसके माध्यम से मेरी शिक्षा हुई।   मैंने रामायण और महाभारत सबसे पहले सिंधी में पढ़ी, और बाद में सी. राजगोपालाचारी द्वारा लिखित अंग्रेजी संस्करण तथा उसके बाद में गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा अंग्रेजी में प्रकाशित विस्तृत संस्करण। विभाजन के पश्चात् मैं कराची से राजस्थान पहुंचा, जहां मैंने देवनागरी पढ़ना और लिखना सीखा। आयु के बीसवें वर्ष की शुरूआत में जिन दो लेखकों की हिन्दी पुस्तकें मैंने पढ़ी उनमें डा0 कन्हैयालाल मुंशी (गुजराती से अनुदित) और महात्मा गांधी के निकट सहयोगी आचार्य विनोबा भावे की थीं।   … Continue reading एक साहित्यिक विभूति को सम्मानित किया बंगलौर ने

AddThis Social Bookmark Button

डा. मनमोहन सिंह ने 2002 में कहा था: खुदरा में एफडीआई रोजगार को नष्ट कर देगा

October 2, 2012
No

अपने पिछले ब्लॉग में मैंने स्मरण कराया था कि एनडीए सरकार के समय कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन मुख्य सचेतक श्री प्रियरंजन दासमुंशी ने खुदरा में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश सम्बन्धी योजना आयोग की सिफारिश का संदर्भ देते हुए वाजपेयी सरकार द्वारा ऐसा ‘राष्ट्र-विरोधी‘ काम करने की दिशा में बढ़ने की निंदा की थी।   वाणिज्य मंत्री के रूप में श्री अरूण शौरी ने संसद में तुरंत खड़े होकर यह दोहराया था कि सरकार ऐसे किसी भी प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है।   पिछले दिनों सूरजकुंड में सम्पन्न भाजपा की राष्ट्रीय परिषद में आर्थिक प्रस्ताव पर बोलते हुए मेरे सहयोगी श्री वैंकय्या नायडू ने डा0 मनमोहन सिंह द्वारा राज्य सभा में विपक्ष के नेता की हैसियत से लिखे गये एक पत्र को उदृत किया जिसमें इस तथ्य की पुष्टि की गई थी। फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र ट्रेडर्स ने इस संबंध में अपनी चिन्ता से उनको अवगत कराया था। 21 दिसम्बर, 2002 के … Continue reading डा. मनमोहन सिंह ने 2002 में कहा था: खुदरा में एफडीआई रोजगार को नष्ट कर देगा

AddThis Social Bookmark Button
Blowjob