ON THE CAMPAIGN TRAIL

April 23, 2014
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Sharing some snippets (mostly media coverage) from my campaign trail: Poll results pre-decided due to 10 years of bad governance, says Advani Press Trust of India | Apr 16, 2014 “In every election there are two adversaries, but it is not so this time. People have made up their mind after ten years’ bad governance and corruption (of UPA) before the polls …even before the results…all the people estimate that this poll is pre-decided” Vajpayee’s tenure best ever: LK Advani IANS | Apr 15, 2014 “Vajpayee’s tenure as PM was best ever,” Advani said addressing election meetings in Bihar’s Banka and Katihar parliamentary constituencies. Advani confident of BJP led NDA coming to power Press Trust of India | Apr 08, 2014 “There is no doubt among the people about whose government will come to power after the Lok Sabha polls and BJP and its allies are going to have an … Continue reading ON THE CAMPAIGN TRAIL

आइए, सारे सांसद सम्पूर्ण सैनिटेशन का अभियान चलाएं

April 3, 2014
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सन् 2013 मे योजना आयोग ने राष्ट्रव्यापी सम्पूर्ण सैनिटेशन अभियान का आकलन अध्ययन किया था। इस अध्ययन में 27 राज्यों के 11519 घरों का सर्वेक्षण किया गया था यानी यह एक विस्तृत सर्वेक्षण था। इस अध्ययन का सर्वाधिक सदमा पहुंचाने वाला एक निष्कर्ष यह है कि सभी ग्रामीण परिवारों का 72.63 प्रतिशत हिस्सा अभी भी ‘खुले में परिवार शौच‘ करता है – इसका अर्थ यह है कि वे झाड़ियों, रेलवे ट्रैक या

LET ALL MPs UNDERTAKE A CAMPAIGN FOR TOTAL SANITATION

April 2, 2014
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In 2013 the Planning Commission did an Evaluation Study on a countrywide campaign undertaken for Total Sanitation. This study covered 11519 house-holds across 27 states which meant quite a comprehensive survey. One of the most shocking conclusions drawn by this survey was that 72.63 per cent of all rural households practice ‘open defecation’ – which means that they relieve themselves behind the bushes, on railway tracks, wherever they feel is fine.   Hindol Sengupta’s book on the basis of which I wrote my last blog has commented :   “How does it help if people are shitting in toilets rather than under the fine open skies listening to birds chirping?  The survey has an answer.

इन आंकड़ों से प्रत्येक देशभक्त को सदमा पहुंचेगा

March 30, 2014
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स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् से सोलहवें आम चुनावों के लिए देश तैयार है।   1947 में स्वतंत्र हुआ, 1950 में संविधान लागू हुआ, जिसमें संसदीय लोकतंत्र को शासन पध्दति के रुप में चुना गया। इसका पहला आम चुनाव 1952 में सम्पन्न हुआ।

EVERY PATRIOT WILL FEEL SHOCKED BY THESE STATISTICS

March 29, 2014
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The country is all set for its Sixteenth General Election since independence. India became independent in 1947. Its Constitution adopted in 1950, accepted parliamentary democracy as its system of government. Its first General Election was held in 1952. Today the country is all set for its Sixteenth General Election to the Lok Sabha. Hindol Sengupta, a Senior Editor at the Indian Edition of Fortune magazine, who has been voted by the global ideas platform IdeaMensch on its list of 32 Entrepreneurs Who Make The World A Better Place, has just produced a book titled “100 Things to know and debate before you vote.” Essentially it is a compilation of statistics about India 2014 which can only shock the reader. Sample for example the 37th item listed in these one hundred things. The half page note is captioned 37. When in need, sell a kidney! The note reads: “In spite of … Continue reading EVERY PATRIOT WILL FEEL SHOCKED BY THESE STATISTICS

जब डा. लोहिया, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय की मुलाकात हुई

March 26, 2014
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गत् रविवार, 23 मार्च, 2014 को मैं संसद के सेंट्रल हॉल में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और समाजवादी आंदोलन के प्रमुख सेनानी डॉ0 राम मनोहर लोहिया को पुष्पांजलि अर्पित करने गया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वह कम से कम 25 बार जेल गए थे।   सन् 1970 में राज्यसभा सदस्य के रुप में मैंने संसद में प्रवेश किया। डा. लोहिया का तीन वर्ष पूर्व यानी 1967 में 57 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। डा. लाहिया से मेरी निकटता और मुलाकात तब से शुरु हुई थी जब मैंने आर्गनाइजर में पत्रकार के रुप में काम करना शुरु किया था। उन्होंने ही मुझे बताया था कि मुस्लिम आम तौर पर जनसंघ के प्रति इसलिए पूर्वाग्रहग्रस्त हैं क्योंकि आप अखण्ड भारत की बात करते हो। मेरा उत्तर था: ”मेरी इच्छा है कि आप दीनदयाल उपाध्याय से मिले होते और उनसे अखण्ड भारत सम्बन्धी जनसंघ की अवधारणा जानते।”   बाद में … Continue reading जब डा. लोहिया, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय की मुलाकात हुई

राजमोहन कहते हैं, शायद महात्मा सही नहीं थे

March 12, 2014
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ब्लॉगों का मेरा दूसरा संग्रह ‘माई टेक‘ शीर्षक से दिसम्बर, 2013 में लोकार्पित हुआ था, जिसमें काफी ब्लॉग सरदार पटेल, उनके द्वारा देसी रियासतों के उल्लेखनीय विलीनीकरण कार्य, और हैदराबाद के निजाम द्वारा भारतीय संघ में शामिल न होने के समझौते पर हस्ताक्षर न करने पर उनके द्वारा अपनाए गए तरीके जिससे निजाम को मुंह की खानी पड़ी, जैसे विषयों पर केंद्रित थे।   अधिकांश लोगों को शायद पता नहीं कि प्रधानमंत्री पंडित नेहरु निजाम के विरुध्द सैन्य कार्रवाई करने के पक्ष में कतई नहीं थे; और जम्मू एवं कश्मीर की तरह वह हैदराबाद के मुद्दे को भी संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद को सौंपना चाहते थे!   यदि कोई भी उन प्रारम्भिक वर्षों के इतिहास का विश्लेषण करेगा तो निश्चित ही यह महसूस करेगा कि गांधी ने पण्डित नेहरु के बजाय यदि सरदार पटेल को स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रुप में चुना होता तो उन प्रारम्भिक … Continue reading राजमोहन कहते हैं, शायद महात्मा सही नहीं थे

लगभग पचास वर्ष पूर्व पढ़ी एक अद्वितीय पुस्तक

March 4, 2014
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प्रत्येक वर्ष मेरी सुपुत्री प्रतिभा अपने माता-पिता की वैवाहिक वर्षगांठ (जोकि फरवरी में आती है) किसी न किसी प्रकार के अनोखे ढंग से मनाती है।   इस महीने की शुरुआत में वह मेरे पास आकर बोली

A UNIQUE BOOK I READ SOME FIFTY YEARS BACK

March 4, 2014
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Every year my daughter Pratibha observes her parent’s Wedding Anniversary (which falls in February) with some specially conceived function.   Early this month, she came to me and said: “This year’s anniversary of yours is very significant. For you, Dada and Ma, who married in 1965, 2014 marks the commencement of your 50th year of togetherness! Let us have this time a family get-together of a kind we have never had earlier.  Kamla, my wife, has one sister and four brothers. Of the four brothers, two are in Mumbai, one is in New Jersey, and the fourth lives in Saint Martin (West Indies). In my case, I have one sister who lives in Mumbai and has two sons and one daughter. The extended families within the country are mainly in Mumbai and Delhi. So for this year’s Anniversary function Pratibha invited all family members, from here and abroad and a … Continue reading A UNIQUE BOOK I READ SOME FIFTY YEARS BACK

डा. मनमोहन-सोनिया के नेतृत्व में संसद की गरिमा रसातल में पहुंची

February 17, 2014
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सन् 2004 से अब तक यानी 2014 तक के दस वर्षों में यू.पी.ए. सत्ता में है। यू.पी.ए.-I सन् 2004 से 2009 और यू.पी.ए.-II  सन् 2009 से 2014।

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